रविवार, 7 मार्च 2010

पुरुष ब्लॉगर ...महिला ब्लॉगर ...सिर्फ ब्लॉगर क्यों नहीं ...?

आप बहुत अच्छा लिखते/लिखती हैं ....

मैं आपकी पोस्ट कई बार पढता/पढ़ती हूँ .....

आपकी सारगर्भित टिप्पणी और विवेचना और बेहतर लिखने को प्रोत्साहित करती है ......

आपकी पोस्ट के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही विचारों पर आपके साथ विमर्श करना चाहता हूँ/चाहती हूँ ....

जरा रुकिए ...

यह सब लिखने से पहले मैं आपकी प्रोफाइल देख लूं ....पहले देखू कि आप स्त्री/पुरुष हैं .....आपकी उम्र क्या है ...आप कैसे दीखते/दिखती हैं .....

आपकी प्रशंसा करने के लिए पहले अपनी उम्र के अनुसार आपको भाई/बहन या बेटा/बेटी या फिर ...??.....कोई तो रिश्ता साबित करना ही पड़ेगा .....

आखिर तो ब्लोगिंग पढ़े- लिखे बौद्धिक पुरुषों/महिलाओं का जमावड़ा है .....हाँ ...ढूंढें तो कुछ इंसान भी मिल जायेंगे ....





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50 टिप्‍पणियां:

  1. दुनिया में गर कोई बला है तो वो ब्लॉगर ही है...इसे क्यों पुरुष और महिला में विभेदित किया जाए...

    जय हिंद...

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  2. इंसान को गर पाएं पहचान
    रचना से मिलें सब अंजान
    जान तभी निकलेगी सच
    पता लगेगा असली असल।

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  3. :) लामबंदी के ख़िलाफ़ बोलने से अकेले पीछे छूट जाने का डर जो बना रहता है न...yes it is high time to call a spade a spade

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  4. बढ़िया लगा पढ़कर ।

    @दीपक भईया

    ये थप्पड़ वाली क्या बात है , हो सके तो स्पष्ट करिए ।

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  5. वाणी,
    तू सही में कुशल गृहिणी है...
    सही नाप-तौल कर, सारा काम करती है...
    बहुत बढ़िया....
    तेरा साथ है कितना प्यारा कम लगता है जीवन सारा...

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  6. आपका मंतव्य समझने की कोशीश कर रहा हूं. ये जलजले इस ब्लाग जगत को चलायमान रखते हैं. यहां इन्ही सब पचडों मे ही रचना कर्म करने का आदि होना पडता है.

    रामराम.

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  7. vaani

    mahila blogger / purush blogger yae kewal aur kewal hindi bloging mae hi hotaa haen aur iskae virodh mae hi do blog baanyae gaeye they chokher bali aur naari . blogger shabd neutral haen to kyun hindi blog samaj mae iskae liyae hindi shabd khoja jataa haen aur kyun phir blogger ko pulling shabd maan kar uska striling banaaya jaataa haen ???

    chhoti magr badhiyaa post kae liyae badhaaii

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  8. यह स्थिति तो दुखद है ही और कटु सत्य भी है...

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  9. इसे कहते है जूता दुशाले मे लपेट कर मारना।

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  10. :) अजी अब क्या कहे, ऊपर वाली टिपण्णियां बहुत कुछ बोल गई है,

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  11. "पोस्ट छोटी है पर सारगर्भित है ।यहाँ की दुनिया में भी लामबन्दी है ।"
    amitraghat.blogspot.com

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  12. आपका कहना बिल्कुल दुरूस्त है...लेकिन उन लोगों का क्या किया जाए जो कुछ सार्थक करने की अपेक्षा ऎसे फालतू के मुद्दे घडने में लगे रहते हैं!!

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  13. ांरी बिटिया सिर्फ ब्लागर????????????? हुम्म्म्म्म्म्म्म चलो सही है। शुभकामनायें

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  14. सच्ची और अच्छी बात कम लफ़्ज़ों में बहुत सारी

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  15. सभी जगह चीख-चीख कर बताने की आदत है कि देखो यह महिला है और यह पुरुष है। अध्‍यक्ष बनो तो बोलेंगे कि अध्‍यक्षा है। चेयरमेन कहो तो चेयरपर्सन बना देते है। मेरा नाम तो फिर ऐसा है कि मुझे झक मारकर श्रीमती लिखना पड़ता है। नहीं तो मेरा खेमा ही बदल दिया जाएगा। अच्‍छी है पोस्‍ट छोटी सी होम्‍योपेथ की गोली सी, असरकारक।

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  16. धन्यवाद!!
    .
    .
    ऐसे मनाये महिला दिवस

    सर्वसाधारण के हित में >> http://sukritisoft.in/sulabh/mahila-diwas-message-for-all-from-lata-haya.html

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  17. वाणी यही आधुनिकता का तकाजा भी है -मैं जब हिन्दी ब्लॉग जगत में घुसता हूँ तो न जाने क्यों शरारत सूझने लगती है -कुछ सूरते हीं इतनी प्यारी सी है जरा की बिना कुछ बोले मन नहीं मान पाता और जो चिढ़ते हैं तो फिर क्यूं न चिढया जाय! आखिर मनोविनोद (मौज नहीं ) भी तो किसी चिड़िया का नाम है ?
    आपका सुझाव सौ टके का है हम सचमुच ब्लॉगर हैं -कोई लिंग ,जाति नहीं है हमारी -मगर हम कभी कभार वर्ड प्ले खेल तो खेलेगें -आप को अच्छा लगता है वर्ड प्ले ? कुछ घरौंदे भी बनायेगें ,तितलियाँ भी पकड़ेगें और मछलियाँ भी -पर रहेगें ब्लॉगर ही ..आपसे वादा !

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  18. घरौंदा, मछलियां, तितलियाँ...!!
    दिल को बहलाने को ग़ालिब ख्याल अच्छा है....

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  19. आप बहुत अच्छा लिखतीं हैं: अगर यह कोई मर्द कह रहा है तो इसका मतलब यही है कि ज़बरदस्ती चांस मार रहा है.

    आपकी पोस्ट कई बार पढ़ता हूँ: अगर यह कोई मर्द कहता है ..तो वो दुनिया का सबसे बड़ा झूठा है... लाइन मार रहा है.

    आपकी पोस्ट के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही विचारों पर आपके साथ विमर्श करना चाहता हूँ: अगर यह कोई भी मर्द कहता है... तो समझ जाइये कि बात करने का बहाना खोज रहा है... आगे चल कर अन्दर का जानवर दिख जायेगा..

    ज़रा रुकिए:--

    १. मर्द ज़्यादातर प्रोफाइल, उम्र, सुन्दरता , नाम या फिर लड़की/स्त्री देख कर ही आते हैं. ...

    २. यह सिच्वैशन देख कर रिश्ता बनाते हैं...

    ३. ब्लॉग्गिंग बौद्धिक पुरुषों/महिलाओं का जमावड़ा है... यह सबसे बड़ा झूठ है... यहाँ ज़्यादातर लोगों के पास लिखने को कुछ नहीं है... और ९९% महिलाएं... अपने को ऊंचा दिखाने के लिए आती हैं.... और मर्द (maximum) चोरी कि सामग्री छापते हैं... अंग्रेजी का ट्रांसलेशन कर के... यहाँ कोई बौद्धिक जमावड़ा नहीं है... यहाँ इंसान नहीं मिलते हैं.... ज़्यादातर लोग कुंठित हैं... अपनी ज़िनदगी में असफल... इसलिए ब्लॉग्गिंग में इंसान कम हैं... ज़्यादातर लोग कुंठित हैं... दूसरों को नीचा ही दिखाते हैं... यहाँ ब्लोगियत मिल जाएगी...इंसानियत नहीं...



    दी..... आपकी यह पोस्ट बहुत अच्छी लगी...

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  20. सशक्त अभिव्यक्ति!

    नारी-दिवस पर मातृ-शक्ति को नमन!

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  21. सटीक बात....विचारणीय प्रश्न

    महिला दिवस की शुभकामनायें

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  22. अजी छोड़िये भी, प्रोफ़ाइल की बातें
    चाहने पर तो पूरी फ़ाइल मिल जायेगी ।

    पर ऎसी नौबत आती ही कहाँ है ?
    तब तक न जाने कितनी पोस्ट दिल को छू चुकती हैं,
    आँखें भी नम हो जाया करती हैं, लिहाज़ा नाक छिड़ँक कर टिप्पणी दे देते हैं.. क्या पता आगे कहीं महासँग्राम चल रहा हो !

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  23. ऊड़ी बाबा..
    ईहाँ ऍप्रूवल के बाद टिप्पणी दिखेगी , पहले बताना चाहिये था, न ?
    अब मेरी टिप्पणी लौटाओ, इसे आगे कहीं और फ़िट कर देंगें ।

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  24. आज दिनों बाद ब्लौग पढ़ने बैठा....कुछ बहसों पर नजर गयी थी।

    ये अदा भी खूब रही, मैम!

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  25. अव्वल तो हम सभी इंसान हैं इसलिये इस पर विचार करना ज़रूरी है । रिश्तों का बनना भी सहजता से हो तभी ठीक है जो रिश्ते बनाने के लिये बनाये जाते है वे निभाये नही जाते ।

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  26. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  27. दी.... शरद भैया.... ने बहुत ही अच्छी बात कही.... यही मैं भी कहना चाहता हूँ... हमें कोई रिश्ता बनाना नहीं पड़ता ....अपने आप बन जाते हैं....

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  28. ....सच कहा ..रिश्ते बनाने नहीं पड़ते बन जाते हैं ....और वही रिश्ते सफल होते है जो अपने आप बनते हैं ...और जो रिश्ते अपने आप बनते हैं ....वे सिर्फ भाई बहन बेटा बेटी माता पिता के ही नहीं ...कई बेनामी भी होते हैं ....जो सिर्फ और सिर्फ इंसान होने के कारण ही बनते हैं ....

    @ आप बहुत अच्छा लिखती हैं ..कोई मर्द कह रहा है ..
    .तू चिंता मत कर ...मुझे ये कोई कहने वाला नहीं है ...हा हा हा हा
    @ सिचुएशन देख कर रिश्ता बनाते हैं ...तू मेरा भाई किस सिचुएशन में बना ...??
    @और ९९% महिलाएं... अपने को ऊंचा दिखाने के लिए आती हैं...
    इस बात पर तो तू मुझसे जरुर पिटेगा ...क्यूंकि तू शत- प्रितशत महिलाओं के ब्लॉग पर लिख कर आता है ...आपकी पोस्ट अच्छी लगी ...
    @ यहाँ ब्लोगियत मिल जाएगी...इंसानियत नहीं...
    मुझे तो इंसानियत हर जगह मिल जाती है ...इसी लिए तो तेरे जैसा भाई यहाँ मिला ....और कुछ अच्छे सच्चे इंसान भी ..:):)

    तू पिटेगा जरुर ....
    बहुत ढेर सारा स्नेह दुलार अपने इस अनजाने अनदेखे छोटे भाई के लिए ....

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  29. @ अरविन्द मिश्रा जी
    मेरे पास वर्ड प्ले खेलने जितना समय कहाँ होता है ...यदि इतना समय हो तो कुछ और बेहतर पढना ही ठीक होगा ...
    @ कुछ बातें सिद्धांत में ही अच्छी लगती हैं ...आप जैसे विद्वान् को मैं क्या कह सकती हूँ ...हो सकता है ...आप ही सही हों ...
    @ घरोंदे , तितलियाँ , मछलियाँ ...वर्ड प्ले में इन्हें कैसे पकड़ा जाता है ...इनका तो पता नहीं ..मगर कुछ दिनों पहले कही पढ़ा था .." सुख और प्रेम तितली की तरह होता है ...जब तक हम इनके पीछे भागते हैं ....कभी पकड़ नहीं पाते ...जिस दिन थक हार कर बैठ जाते हैं ...हमारे कंधे पर आकर बैठ जाता है तितली सा ..."
    इस लिए जो लोग उद्विग्न , बेचैन व्याकुल से सुख के पीछे भागते हैं ....उसी स्थिति में रह जाते हैं जब कि शांत चित्त विद्वान्/विदुषी सब जानते- बूझते भी चुप होकर बैठते हैं ...सुख और मानसिक शांति उनके क़दमों में होती है ....

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  30. @ निर्मला जी
    आपकी स्नेही बिटिया तो मैं हमेशा रहूंगी ...यह पोस्ट किसी और सन्दर्भ में है ...आप अन्यथा ना लें...

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  31. दी.... मैं तो आपका भाई स्वाभाविक रूप से बना.... मुझे आपसे रिश्ता बनाना नहीं पडा.... वो अपने आप बन गया....

    आज बहुत दुखी हूँ.... इस आभासी दुनिया में कभी रिश्ते नहीं बनाने चाहिए... कई रिश्ते दर्द देते हैं.... बहुत दर्द देते हैं... ऐसा दर्द जो नासूर बन जाता है...

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  32. आपके हर शब्द में मैं अपना शब्द मिलाती हूँ....
    पता नहीं कब लोग किसी भी चीज को केवल मनुष्य रहकर देखें और सोचेंगे...

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  33. पहली टिपण्णी केवल पोस्ट पढ़ कर की....फिर देखा लम्बी लम्बी टिप्पणियाँ हैं...लगा देखा लेते हैं....
    लेकिन सच कहूँ,मन जरा भारी हो गया सब पढ़कर.....
    महफूज जी सच कह रहे हैं क्या ???? क्या सचमुच प्रोफाइल देखकर पोस्ट पढ़ी जाती है????

    खैर, जाने दो ऐसा होता भी है तो हुआ करे....इसके लिए मन बैठाने का नहीं....अपना काम है सार्थक लिखने का प्रयास कर संतोष पाने का...बस वही करना है...नहीं ???

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  34. संदर्भ स्पष्ट होता तो शायद कुछ बेहतर कह पाते..

    वैसे होना तो सिर्फ ब्लॉगर ही चाहिये.

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  35. रोचक पोस्ट! टिप्पणियां मजेदार हैं!

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  36. अरे मैंने कमेन्ट किया था....लगता है उसी समय dc हो गया...और कमेन्ट पोस्ट नहीं हो पाया...सॉरी वाणी..तुमने बहुत ही सटीक बात कही है...लेखन को वर्गों में क्यूँ विभाजित करें....और सच्चे मन से बिना लोकप्रियता पाने की चाह में बिना कोई समझौता किये लिखो...तो बिना फर्क किये कि ये स्त्री का ब्लॉग है या पुरुष का ,सब पढ़ते हैं...जताएं नहीं ये बात दीगर है
    (अदा मैडम ने आपकी लिए मेरे ब्लॉग (अपनी, उनकी, सबकी बातें) पर कुछ लिखा है)

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  37. आपको शादी कि सालगिरह मुबारक हो वाणी जी...
    इश्वर सदा आपको खुश रखे...

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  38. Mazedar comments!
    Shadeeki salgirah bahut,bahut mubarak ho..Adaji ke blogse pata chala!

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