मंगलवार, 13 अप्रैल 2010

मैं इसके आगे क्या कहूँ ...

हिंदी ब्लोगिंग में जो मैंने पाया ....
कैसे कहूँ कि सब ही गंवाया ...

वास्तविक जीवन के समानांतर चल रही हिंदी ब्लोगिंग की आभासी दुनिया ....इधर जो माहौल बना हुआ है मन बहुत दुखी और उदास था ... इसी निराशा(अपने स्वाभाव के विपरीत ) के भंवर में डूबते -उतरते एक मेल ने जो हौसला दिया ...मन सारी दुविधाओं से मुक्त हो गया ....सम्मान और स्नेह की इस अविरल धारा के आगे बड़े से बड़ा पुरस्कार भी क्या मायने रखता है ...वास्तविक दुनियावी रिश्तो के साथ ही ये अनाम बेनामी रिश्ते ही जीवन का संबल बने हुए है जो विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में भी मनोबल बनाये रखते हैं और मैं और अधिक दृढ़ता से अपने कर्तव्य और सत्य पथ पर खड़ी हो जाती हूँ ....देखे आप भी और इसी तरह दूसरों का संबल बनने की कोशिश करे कि कोई अपने धर्म ,ईमान और सत्य मार्ग पर अविचलित चलता रहे ....बना रहे ....
नतमस्तक हूँ इस प्रेम और सम्मान के आगे ....आप भी होंगे ....जरूर ...


वाणी, मैं आपके विचारों और संस्कारों से कितनी प्रभावित हूँ....बिलकुल भी नहीं बता सकती शब्दों में...
चाहे कहीं भी की गयी आपकी टिपण्णी हो या पोस्ट सब आपके सुरुचिपूर्ण व्यक्तित्व और सुसंस्कार को प्रतिबिंबित करते हैं और सच कहूँ,आप जैसे लोगों को देख मन आनंदित उत्साहित हो जाता है और स्वतः ही प्रभु को नमन करने लगता है,क्योंकि प्रत्येक सात्विक ह्रदय प्रभु का वास जो होता है.......
ऐसी ही रहें ...हमेशा ...बहुत बहुत अच्छी...

मेरा जवाब ...

आप चाहे तो मुझे दीदी कह सकती हैं मगर मैं मानती हूँ कि एक विशेष उम्र के बाद सभी हमउम्र हो जाते हैं ...
आपने मेरे विचारों को इतना सम्मान दिया ..मेरे लिए गर्व की बात है ...इंसान गलतियों का पुतला है और जो अपनी या दूसरों की गलतियों से सीख लेता हुआ श्रेष्ठ जीवन की ओर बढ़ता है ...मैं भी इसी तरह सीखती गयी हूँ और अपने विचारों को परिष्कृत करती रही हूँ ...हाँ ..आज मुझे आत्मसंतोष है कि मैंने अपनी सभी दुर्बलताओं पर काबू पा लिया है ...
आपकी इस मेल ने मेरा बहुत हौसला बढाया है ...आशा करती हूँ कि हम आपस में इसी तरह संवाद कायम रखेंगे....




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19 टिप्‍पणियां:

  1. तो यह सब कहना पड़ता है तब ही लोग समझते हैं ..मैं बुडबक ही रह गया !

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  2. यह बात बिलकुल सही है..मैं भी बहुत प्रभावित हूँ...कहा भी है कई बार बस....लिख कर नहीं दिया...
    बहुत बहुत अच्छा लगा पढ़ कर....ऐसे ही अच्छी बनी रहो हमेशा...

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  3. अरे वाणी गीत जी .............बहुत दिनों बाद राम राम .........अपुन क्या टपोरी है साला .......एकदम खडूस कद्दू
    वो मेल जिसने लिखेला बिलकुल सच्ची बोला ...........आप क्या नी अब मेरे को ज़्यादा कुछ बोलना -बतियाना आवे नी ......पर बोलू मैं सौ की सीढ़ी सच्ची एक बात वो जो झंडा लहरा रिया हैं नी अरे उप्पर देखों नी ..............बस वैसेइज टाइप के के बने रहना ........................असली हिन्दुस्तानी ...............

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  4. आपके बारे में सही ही तो कहा है,ऐसी आप है हीं .

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  5. इंसान गलतियों का पुतला है और जो अपनी या दूसरों की गलतियों से सीख लेता हुआ श्रेष्ठ जीवन की ओर बढ़ता है ...मैं भी इसी तरह सीखती गयी हूँ और अपने विचारों को परिष्कृत करती रही हूँ ...हाँ ..आज मुझे आत्मसंतोष है कि मैंने अपनी सभी दुर्बलताओं पर काबू पा लिया है .
    ज़माने में उसने बड़ी बात कर ली
    ख़ुद अपने से जिसने मुलाक़ात कर ली
    बहुत अच्छी पोस्ट।

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  6. अच्छी रहें, अच्छा लिखती रहें, यही प्रार्थना है ।

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  7. बहुत सच्ची बात...जो इंसान गलतियों को सुधार अपनी सोच को परिष्कृत कर जीवन में आगे बढे वो निश्चय ही दूसरों के मार्ग को भी प्रशस्त करता है....

    अभी आपके दुसरे ब्लॉग पर आपकी नयी रचना पढ़ी...
    मैं जिंदगी से मैं बन कर मिली....शायद यही पंक्ति थी....मन को छू गयी ये पंक्ति...

    शुभकामनायें

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  8. बहुत सही दृष्टिकोण है. शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  9. सही कहा वाणी...बस ऐसे ही कुछ फ्रेंड्स , लिखने का हौसला बनाए रखते हैं...
    और दुखी क्यूँ होना किसी भी बात पे...अगर १०० में से ९९ नाखुश हों..तो जो एक खुश है..बस उसी की बात पे ध्यान दे आगे बढ़ना है

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  10. aap ise deserve karti hain...aur aapka mann udaas? jiske haath mein kalam kee takat use kaisa akulana...
    lahron ke viprit mukaam pe chalna kalam ke vash me hota hai

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  11. hame bhi aapse seekhna hai, dekhen aapki blogging ki duniya hame kya seekhati hai...........:)

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  12. वास्तव में अब ये दुनिया पूरी तरह से आभासी रह भी कहां गई है...

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  13. सम्मान और स्नेह की अविरल धारा के आगे कोई भी पुरस्कार महत्वपूर्ण कैसे हो सकता है ! सही कहा आपने !
    प्रविष्टि का आभार ।

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