शनिवार, 17 जुलाई 2010

आपका नाम नहीं है तो भी आभार स्वीकार कीजिये ...(एक वर्ष का सफ़र -2)

ब्लॉग बनाये कुछ ही दिन हुआ था की प्रेमचंदजी का सन्देश आया कुछ त्रुटि की ओर  ध्यान दिलाने और उसमे सुधार करने हेतु ... इसके अलावा ग़ज़ल लेखन में भी अपने सुझाव देते रहे हैं ... आभार ...
वर्षाजी , मुझे अपनी रचनाएँ प्रिंट मीडिया में भेजने के लिए प्रोत्साहित करने का बहुत आभार ...
अविनाश वाचस्पति जी ने पिताजी ब्लॉग पर लिखने का मौका दिया ...बहुत आभार ...

शरदजी ने भी मेरी ग़ज़ल रचना यात्रा में पर्याप्त सुझाव दिया ... आभार ...

समीरजी से मुझे शिकायत है की यूँ तो दिन में घूम -घूम कर 1०० से १५० ब्लॉग पर टिपण्णी करते हैं और नए रचनाकारों को पूरा समर्थन और सहयोग देते हैं हैं मगर मेरे ब्लॉग पर थोड़ी देर से पहुंचे ...वैसे मैं उन्हें दोषी नहीं मानती ..कौन ऐसा झंडा उठाऊ लेखन हो रहा था जो , मगर जब से टिपियाना शुरू किया है ...तब से लेकर आजतक के लिए बहुत आभार ... शेष आभार आगे टिपियाने पर निर्भर करेगा ...:):)

क्वचिदन्यतोअपि से अरविन्दजी को अपने समर्थक की सूची में देखकर आश्चर्य के साथ बहुत प्रसन्नता भी हुई ...कि  वे एक सामान्य  गृहिणी के लिखे हुए को भी इतनी संजीदगी से पढ़ते हैं ..हैं ... उनकी बौद्धिकता पर कोई प्रश्नचिंह लगाया ही नहीं जा सकता ...कई बार कुछ शब्दों और पोस्ट पर अटकने पर या ब्लॉगजगत की हलचल जानने मैं उनकी बेहिचक मदद लेती हूँ ..क्यूंकि मेरे मेल बॉक्स में अक्सर ऑनलाईन नजर आ जाते हैं ..कभी कभी उनके कमेंट्स खिझाते भी हैं मगर जरुरत होने पर एक शुभचिंतक की तरह डांट- डपट के अलावा सही सलाह भी देते हैं ... तमाम वैचारिक मतभेद के बावजूद मैं उनका बहुत सम्मान करती हूँ ...और आभार भी ...

अरविन्दजी के जरिये ही गिरिजेश जी के ब्लॉग तक पहुंचना हुआ और उनसे परिचय भी ...मैं गिरिजेशजी को ब्लॉग जगत के निर्मम बौद्धिक साहित्यकारों की श्रेणी में देखती हूँ ...ये इसलिए हाई फाई ब्लॉगर की पदवी भी पा चुके हैं ...टिप्पणी तभी करते हैं जब जरुरी समझते हैं ...मगर सुझाव बिना शर्त देते हैं ...बहुत आभार ...

रश्मि प्रभाजी से ना जाने कैसा रिश्ता है ... अपने आशावादी विचारों के बावजूद
कभी-कभी जब उदास होती हूँ , उनके छोटे छोटे शब्द बहुत उर्जा प्रदान करते हैं ... उन्हें आभार कहूँ ...?

इसी तरह अदा और महफूज़ का भी मैं आभार प्रकट नहीं कर सकती ...इन दोनों का भरपूर सहयोग, समर्थन और स्नेह मुझे मिला है ...
रश्मि रविजा साथी ब्लॉगर के साथ एक अच्छी दोस्त भी है ...कई बार हमारे बीच स्वस्थ बहस होती है मगर मन मुटाव कभी नहीं हुआ ...वह मेरी ही तरह दूसरों के व्यक्तित्व की विभिन्नता को खुले मन से स्वीकार करती हैं और अपना विरोध बहुत विनम्रता से प्रकट करती हैं ... इतनी अच्छी दोस्त बनी रहने के लिए बहुत आभार ...
शिखा , ब्लॉग यात्रा में साथ बने रहने के लिए बहुत आभार ...
मुक्ति , तुमने ठीक ही कहा है कि मुझे तुम्हे तुम ही कहना चाहिए ... तुम्हारे सारगर्भित कमेंट्स बहुत संबल प्रदान करते हैं और बौद्धिक वाद -विवाद की स्थिति में मैं तुम्हे हमेशा अपने साथ पाती हूँ ... खुश रहो और हमेशा ऐसे ही साथ रहो
हरकीरत जी , मैं अब बिलकुल दुरुस्त हूँ , आपकी  शुभकामनायें और साथ मिलती रहें ऐसे ही...
खुशदीप जी , अपने नाम की तरह ही ब्लॉग जगत में भी खुशिया बिखेरते हैं ...आभार
हिमांशु एवं अमरेन्द्र , तुम्हारी सार्थक टिप्पणियां हर पोस्ट का अच्छा विश्लेषण करती हैं और मेरे शब्द ज्ञान को बढाती हैं ...

इन्दुपुरी जी यूँ तो ब्लॉग पर कमेन्ट नहीं करती मगर जब भी बात होती है , डौल , गुडिया , आदि के संबोधनों से स्नेह बरसाती रहती है ..अब इसका मतलब ये भी नहीं कि मैं खुद को गुडिया ही समझने लगू ...बुढिया होने की तरफ बढती अपनी उम्र का एहसास मुझे बखूबी है ...मगर दिल से बचपन की मासूमियत भी गयी नहीं है ...बच्चे मासूम होते हैं , मूर्ख नहीं ...

बहुत निराशाजनक स्थिति में रंजनाजी की हौसलाफजाई तो भूले नहीं भुलाई जाएगी ...संगीता स्वरुप जी का नियमित ब्लॉग पठन बहुत हौसला देता है ...
शोभना चौरे जी, मेरी अनुपस्थिति को आपने महसूस किया , मैं अभिभूत हुई , बहुत आभार ...

ज्ञानदत्त पांडेयजी , निर्मला कपिलाजी , संगीता पुरीजी , घुघूती जी , वंदनाजी , रंजना भाटिया जी , राज
भाटिया जी , दिनेश राय द्विवेदी जी , ललित जी , अवधिया जी ,एम.वर्माजी, राजीव ओझा जी आदि वरिष्ठ ब्लॉगर समय समय पर अपना अमूल्य समय मेरी पोस्ट को देकर मेरा मान बढ़ाते रहे हैं ...बहुत आभार ....

अजित गुप्ता जी से परिचय (ब्लॉग के जरिये )ज्यादा पुराना नहीं है ...मगर पुराना सा ही लगता है ...आभार
प्रवीण पांडेयजी, अजय झाजी , मनोज कुमार जी , जाकिर अली जी , अली जी , मनोज कुमार सिन्हाजी , दीपक मशाल , सूर्यकांत गुप्ता जी , सतीश पंचमजी , निशांत मिश्रजी , रूपचंद्र शास्त्रीजी , अनामिका जी , सिद्धार्थ शंकर जी , दिलीप जी , संजय भास्कर जी , वत्स जी , प्रज्ञा पाण्डेय जी , विनोद पाण्डेय जी, सतीश सक्सेनाजी, विकास अग्रवाल , स्वप्निल , पाबला जी , हरि शर्मा जी , अमित शर्मा जी , ...सहित सभी टिप्पणीकारों और शुभचिंतकों का बहुत आभार ......
यदि किसी टिप्पणी कार या साथी ब्लॉगर का नाम रह गया है तो कृपया मुझे क्षमा करें , यदि मैंने अनजाने ही किसी का दिल दुखा दिया है  तो मुझे क्षमा  करें।  मेरे सामान्य लेखन को आप लोगो ने इतना सम्मान दिया , मैं हमेशा आभारी रहूंगी ...

आजकल ब्लॉगजगत का जो माहौल बना हुआ है , उस पर भी प्रकाश डालना उचित है ...कोई किसी पर रचनाएँ चुराने का आरोप लगा रहा है तो कोई किसी पर पत्र पत्रिकाओं से अनुवादित सामग्री को अपना बना कर पेश करने का इल्जाम लगा रहा है और दिलचस्प बात यह है कि इनके कमेंट्स बॉक्स में ये लोग एक दूसरे की तारीफ करते नजर आ रहे हैं ...मेरा लिखने का मकसद सिर्फ यह है कि अलग- अलग लोगों से प्राप्त सूचनाओं पर विश्वास करने की बजाय अपने विवेक का इस्तेमाल करें ...इन दिनों यह अंतरजाल नहीं नारद- मंथरा जाल लगने लगा है ...


एक बार फिर से बहुत आभार ...
पोस्ट समाप्त करते-करते पॉवर कट के दौरान आज के डेली न्यूज़ के रविवारीय परिशिष्ट में छपी कविता इतनी पसंद आई ...जो मेरी अपनी अभिव्यक्ति सी लग रही है ...आप में से कुछ लोगो को भी पसंद आएगी जरुर ... 

श्री आर .चेतन क्रांति जी की इस कविता का कुछ अंश प्रस्तुत कर रही हूँ ...

कुछ तो है जो मुझे तरक्की से बाज रखता है
कुछ तो है जो मुझे ऐन वक़्त संकोच से भर देता है
जब मेरे पास अत्याचार का अवसर होता है
और अन्याय के सब हथियार मुझे दे दिए गए होते हैं

मैं ताकतवरों को कुछ नहीं कहता
ईर्ष्यालुओं को साजिशों के लिए पूरा वक़्त देता हूँ
और देवयोग से जिन्हें मेरा मालिक नियुक्त किया है
उनको तमाम वजहें कि जब उनको खुजली हो वे मेरी छंटनी करें

फिर भी कोई चीज है जो मुझे तरक्की से बचाए रखती है
कोई जेनेटिक जिद , कोई नाराजगी
या सिर्फ वितृष्णा
उनसे जिनका मुंह चप्पल -सा बजता रहता है...
सफलता ...सफलता ...सफलता



32 टिप्‍पणियां:

  1. वाणीजी, आपने इतने सारे नामों का उल्‍लेख करके वास्‍तव में ब्‍लाग-जगत को एक परिवार की संज्ञा दे दी है इसलिए आपको बधाई। आप हमेशा श्रेष्‍ठ लिखती रहें और सबके दिलों पर राज करती रहें, यही शुभकामना है।

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  2. आपके आभार-ज्ञापन को पढ़ते हुए इतने ब्लोगरों को इकट्ठा जानना भी हुआ ! अजीत गुप्ता जी द्वारा दी गयी शुभकामनाओं को मैं भी प्रेषित कर रहा हूँ ! अंत में आर. चेतनक्रान्ति जी की कविता बड़ी अच्छी लगी , जब कहीं इनका जिक्र होता है , इनके द्वारा लिखी गयी कविता ' सीलमपुर की लडकियां ' का स्मरण हो जाता है ! आभार !

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  3. आपने सबको एक पोस्ट-छत्र के नीचे समेट कर एक परिवार होने का भाव दिया।

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  4. वाह वाणी जी थ्हे तो कमाल ही कर दियो,

    (जिनका मुंह चप्पल सा बजता रहता है)

    आज थारी मारवाड़ी मै लिख्योड़ी पोस्ट याद आगी म्हाने

    बधाई

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  5. मुझे याद रखने के लिए आभार .. आपको भी बधाई और शुभकामनाएं !!

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  6. आगे तो खैर अब मिस करने की हिम्मत छूट गई... :)


    लगे रहेंगे मगर बहुते आभार व्यक्त कर दिया है सबका..शुभकामना!! :)

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  7. बहुत बहुत बधाई और शुभकामनायें ।

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  8. वाणी जी, मैंने पहले ही कहा था कि आपकी साफगोई या स्पष्टवादिता मुझे प्रभावित करती है... अभी से नहीं तबसे जबसे आपने मेरी एक कविता "औरत पागल होती है "इमोशनल फूल" पर टिप्पणी दी थी और मैंने उसे आधार बनाकर पूरी एक पोस्ट ही लिख डाली थी.. :-) वह बौद्धिक बहस बहुत अच्छी लगी थी. मुझे हमेशा खुद को टोकने वाले और मेरे विचारों पर खुलकर विरोध प्रकट करने वाले लोग अच्छे लगते हैं...
    मुझे तब नहीं लगा था कि आप मात्र एक गृहिणी हैं... मुझे तो आप कोई यूनिवर्सिटी की प्रोफ़ेसर लगी थीं :-) सच्ची...
    बौद्धिकता किसी की थाती नहीं होती और ना ही सहजबुद्धि पर किसी एक का हक होता है... हमारे देश में महान व्यक्तित्वों की माँयें गृहिणियाँ ही रही हैं और आज ब्लॉगजगत की अनेक सक्रिय महिला ब्लॉगर भी गृहिणियाँ ही हैं. इसलिए खुद को मामूली गृहिणी कहना छोड़ दीजिए ... हाँ नहीं तो (साभार अदा जी से क्योंकि इस पर तो उन्ही का कापीराईट बनता है)

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  9. इतने भारी आभार प्रदर्शन की आवश्‍यकता नहीं वाणी जी। सलाह देने से कुछ बिगड़ता नहीं, अच्‍छा लगता है कि इससे कोई , लाभान्वित हो रहा है। वैसे भी लेखन की दुनिया बेहद एकांतिक होते हुए भी सामाजिक है। इसलिए सब मित्रभाव से परस्‍पर सहयोग करते हैं। आभार और बधाई कि आपने इतने कम समय में इतनी ऊंचाइयां हासिल कीं। शुभकामनाएं।

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  10. आपकी इतनी सुन्दर पोस्ट और मुक्ति की टिप्पणी ’सोना’ :)
    बहुत बहुत बधाईया...

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  11. आपकी यह ब्लोग्नरायन कथा समाप्त हुई ? चलिए सबने प्रसाद भी ग्रहण किया ....बहुत दिनों से तुम्हारा स्वयं का लिखा कुछ पढने को नहीं मिल रहा...अब नयी स्फूर्ति से नया लिखो... शुभकामनायें...

    नाम याद रखने के लिए आभार...नहीं भी होता तो भी आभार मान लेते...

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  12. सब को आपने इस में ले लिया बढ़िया लगी यह पोस्ट मेरा नाम याद रखने के लिए शुक्रिया

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  13. बहुत ही बढिया तरीके से स्नेह और आभार व्यक्त किया है……………इसी तरह आगे भी लेखन के नये कीर्तिमान स्थापित करती रहो ये ही शुभकामनायें हैं।

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  14. नाम गम जाएगा... आभार! कुछ मिल ही रहा है न, रख लेते हैं... नाम के चक्कर में पड़े तो कहीं आभार भी हाथ से न जाए.

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  15. साधारण गृहिणियां इतना परिश्रम से बौद्धिक कार्य नहीं कर सकतीं :)

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  16. jitna achchha lekhan hai aapka utna hi achchha apka sochna bhi hai.

    badhai ho...aur haan, kavita bahut pasand aayi.

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  17. बहुत बहुत बधाई ! अनन्त शुभकामनाएं ।

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  18. बहुत बहुत बधाई ! अनन्त शुभकामनाएं ।

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  19. मेरा कमेन्ट कहाँ गया??..कल तक वापस नहीं आता तो फिर एक बार लिखूंगी

    वैसे आभार तो तुम्हारा है कि मुझे दोस्त बनाया...

    और इतनी यादें करीने से सहेज कर रखा और इतनी खूबसूरती से अपना एकवर्षीय ब्लॉग सफ़र लिखा..
    Praying hard...ki ye comment gaayab na ho :(

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  20. आपकी इस भावनात्मक पोस्ट नें आपस में एक परिवारतुल्य सुखद अहसास करा दिया....
    आभार एवं शुभकामनाऎँ!!

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  21. कविता जो आपने चुनकर लगाई है वो वास्तव में पठनीय है... बहुत बहुत आभार पढ़ाने के लिए मैम... और याद करने के लिए भी.. :)

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  22. :)अनेकों शुभकामनाये वाणी जी

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  23. मेरे से पहले दी गई सभी टिप्पणियों में मेरे भी भाव जोड़ दे |आपके आभार की पोस्ट पढ़ते पढ़ते मैभी उसी तरह महसूस करने लगी हूँ जिस तरह आप पोस्ट लिखते लिखते महसूस कर रही थी |हम लोग क्यों ?इतने सुन्दर भावो से भर जाते है \
    खैर शायद यही प्रेम है | बहुत अच्छी पोस्ट और आभार इतनी सुन्दर कविता पढवाने के लिए |

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  24. अरे! वाह.... दी...आपकी बात ही अलग है....

    आपका

    नौटंकी...


    हे हे हे हे हे ......

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  25. वाह !!
    क्या गृहिणी है ...सबकी छुट्टी करती है और साधारण गृहिणी बनती है.....बड़े-बड़े प्रोफेशनल फेल हो गए यहाँ आकर ....हाँ नहीं तो...!!
    हम भी बहुत आभार मानते हैं आपका...बहुत भारी हैं न हम....
    तुम्हारी...मोटी..

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  26. कई दिन हो गये, आपका मन भारी हुआ था। अब तक ह्ल्का नहीं हुआ क्या? लिखिये न कुछ, इंतज़ार है।

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  27. आपको एक ही साल हुआ है ब्लौग पर..? लीजिये हम तो सोच रहे थे मैम कि आप हमसे भी पहले से हैं।

    ढ़ेरों मुबारकबाद पहली वर्षगाँठ पर।

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  28. देर से ही सही पर आपको एक वर्ष ब्लॉग्गिंग का पूरा करने पर हार्दिक बधाई !

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  29. वाणी जी,
    आजकल मेरी हालत फ्री इलैक्ट्रोन जैसी हो गई है, जो ब्लॉग की आरबिट मे कम ही बैठता है...आता भी हूं तो बस पोस्ट लिखकर चार्ज लेने के लिए...इसी चक्कर में आपकी इस पोस्ट पर वक्त से नज़र नहीं पड़ी...इसलिए मेरे नाम का ज़िक्र करने के लिए अब आभार जता रहा हूं...आप बस अपनी ओजस्वी वाणी से ब्लॉग की धारा यूं ही बहाते रहिए, हमारा डुबकी लगाने से अपने आप ही उद्धार होता रहेगा...

    जय हिंद...

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