गुरुवार, 15 जुलाई 2010

एक वर्ष की ब्लॉग यात्रा ...

अभी पिछले दिनों हरियाणा की एक महिला ब्लॉगर से बात हुई ..सामान्य परिचय के आदान प्रदान के दौरान जब उन्हें बताया कि मैं जयपुर से हूँ तो उन्हें आश्चर्य हुआ ...वो मुझे बनारसवासी मानती थी ... ब्लॉगिंग के शुरूआती दिनों में बहुत से ब्लॉगर मुझे और अदा को एक ही समझते थे ,धीरे -धीरे सबकी ग़लतफ़हमी दूर हुई ...
आजकल रश्मि रविजा एक कहानी लिख रही है ...अपनी प्रविष्टियों के साथ साथ वे ब्लॉग पर आभार भी व्यक्त करती जाती हैं ...यही फुर्ती नवोदित ब्लॉगर दिव्या (zeal )में भी है ...यहाँ हम इतने आलसी कि जैसे तैसे एक पोस्ट लिख दे वही बहुत ... ...कहते हैं की सदगुण को अपनाने में देर नहीं करनी चाहिए चाहे वो किसी दुष्ट से भी मिले तो ये तो भद्र , बुद्धिमती लेखिकाएं हैं ...राम ने भी लक्ष्मण को महाज्ञानी रावण से नीति ज्ञान ग्रहण करने का आदेश दिया था ....सोच रही हूँ  मैं भी सबका आभार एक बार में ही सलटा दूं ...बड़ा कर्ज इकठ्ठा हो गया है ब्लॉगर साथियों का ...और यह विचार मुझे महफूज़ के आभार ज्ञापन करती पोस्ट से मिला है ...इसी बहाने अपनी एक वर्ष से भी अधिक की ब्लॉग यात्रा से भी गुजर लूं ...
नया -नया इन्टरनेट कनेक्शन लिया तो बच्चों से ऑरकुट के बारे में पता चला ...अपना खाता बनाया तो देखा  दर्जन भर रिश्तेदार भी पहले से हाज़िर हैं ...वे भी जिनसे एक ही शहरमें  होने के बावजूद कब से संपर्क नहीं था ...दिन महीने साल इतनी तेजी से भागते रहते हैं कि  समय का पता ही नहीं चलता ...
खैर , इसकी दौरान अपनी एक कजिन से भी ऑरकुट पर ही मुलाकात हुई और आभासी दुनिया से होते हुए पुरानी आत्मीयता फिर से जगी ...उसके पति चिकित्सक है ...एक दिन बातों ही बातों में उनकी वेबसाइट/ब्लॉग के बारे में पता चला ...इन्टरनेट सर्फिंग पर उनकी वेबसाइट ढूंढते उनके हमनाम अरविन्दजी का ब्लॉग नजर आया ...सुन्दर रंग बिरंगी मछली के परिचय के साथ ...एक- दो बार विज्ञान पत्रिका में लेख पढ़ चुकी थी और विज्ञानं विषय में रूचि के कारण ब्लॉग पढना शुरू किया ...वैसे तो ऐसा कौन सा विषय है जिसमे हमें रूचि नहीं , सब कुछ जानने समझने (ऐसा क्यों हुआ , कैसे हुआ ) की लत सी है ... तभी उन दिनों अखबार में भी पढ़ा की हिंदी में ब्लॉग बनाना बहुत आसान है, बस धुन सवार हो गयी, अपना ब्लॉग बनाने की ...कई प्रयासों के बाद ब्लॉग बना और और पुरानी डायरियों से ढूंढ कर कुछ लिखा .. और इस तरह हमारी ब्लॉग यात्रा प्रारंभ हुई ...
पढना तो शुरू किया मगर कमेन्ट करने का साहस नहीं होता था ..कैसे किया जाए , कहीं कुछ गलत लिख गया तो...क्योंकि लिखने की आदत छूटे वर्षों हो गए थे ...
हिमांशु और ताऊ रामपुरिया शुरूआती समर्थक बने और इनके कमेंट्स लगातार लिखते रहने की प्रेरणा देते रहे ...
इनके ब्लॉग के जरिये दूसरे और ब्लॉग्स का परिचय मिला और अपनी ब्लॉग यात्रा की ट्रेन सरपट दौड़ी ...और अब तक चल रही है , कभी धीरे , कभी तेज ...इसी लेखन पठन के दौरान अदा(स्वप्न मञ्जूषा ) , रश्मि रविजा , रश्मिप्रभा जी से परिचय हुआ ...सुबह जल्दी उठकर पोस्ट लिखने और पढने के दौरान अदा से बातें भी चलती रहती ... पोस्ट , टिप्पणी  , ब्लॉग ,ब्लॉगर , घर परिवार पर ढेरों बातें होती .....

इसी दौरान कबीरा खड़ा बाजार के कनिष्क से ब्लॉग पर लिखने का निमंत्रण मिला ...समय की कमी के कारण आजकल उधर लिख नहीं पा रही मगर नए रचनाकारों को सम्मान और अवसर देने के लिए मैं उसकी आभारी हूँ ...अपने से छोटों को उसका, तुम, या तू कहने का अधिकार मैं बिना मांगे ले लेती हूँ  ... नारी से रचना जी ने अपने ब्लॉग पर लिखने का निमंत्रण दिया ...कुछ मतभेदों के कारण नारी मंच छोड़ना पड़ा...वैचारिक भिन्नता के बावजूद रचनाजी के साहस और दृढ़ता की मैं बहुत प्रशंसक हूँ ... उन्होंने हमेशा सहयोग किया ....
......जारी

29 टिप्‍पणियां:

  1. चलने दिए नेट यात्रा की कहानी

    आभार

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  2. ब्लागिंग का सुनहरा संस्मरण ,अच्छी प्रस्तुति ।

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  3. कहानी रोचक है और कई तटस्थ प्रतिभाओं को ब्लॉगिंग के क्षेत्र में उतारने की क्षमता रखती है। कई विशालमना हैं इस क्षेत्र में जो नवोदित प्रतिभाओं को उत्साहित करते रहते हैं। इसे क्रमवत रखें।

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  4. कहानी रोचक है और कई तटस्थ प्रतिभाओं को ब्लॉगिंग के क्षेत्र में उतारने की क्षमता रखती है। कई विशालमना हैं इस क्षेत्र में जो नवोदित प्रतिभाओं को उत्साहित करते रहते हैं। इसे क्रमवत रखें।

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  5. बढिया प्रस्‍तुतिकरण .. आगे बढते रहें !!

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  6. आप जयपुर की हैं जानकार आनन्‍द हुआ। वैसे मेरा नम्‍बर क‍ब आएगा? मजाक कर रही हूं अच्‍छा प्रयास है जारी रखें।

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  7. हम तो जैसे जानते ही न हों बिल्कुल... :)

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  8. aapka blog achha laga . Likhne me sanjdgi jhalkti hai . Agar samaya mile to Sakshatkar.com par or Tahelka.co.in par likhe . Mai aapka abhari rahuga .

    Sushil Gangwar
    www.sakshatkar.com
    www.tahelka.co.in

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  9. keep writing
    i love you and will always do
    irrespective of the fact that we don't share naari blog platform any more but i have always said that you are welcome to join it when you want


    every single word of appreciation makes me smile so i am smiling dear vani

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  10. आप भी जयपुर की हैं...वाह...झंडा ऊंचा रहे हमारा...:))

    नीरज

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  11. यात्रा अच्छी लग रही है...हम जयपुर के नहीं तो क्या हुआ २५ साल राजस्थान में ही गुज़ारे हैं...आपकी इस यात्रा के हमसफ़र हैं..रोचक प्रस्तुतिकरण

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  12. :)

    aapne ek post me abhaar salta diya humne ek smile me comment salta diya.. lol !

    hum apke padosi hain, Ajmer se.

    best wishes ma'am...

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  13. अदा जी और आप को एक समझना...

    एकता कपूर के सीरियल के लिए जबरदस्त प्लॉट बनता है ये तो...

    जय हिंद...

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  14. अच्छी लग रही है आपकी ये यात्रा ..अब आगे आगे देखते हैं कौन कौन से पड़ाव आते हैं :)

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  15. मैं भी आपसे छोटी हूँ, मुझे तुम कहा कीजिये. हाँ नहीं तो... :-) (साभार अदा जी से ...इस पर उनका कापीराईट जो है :-))... अभी तो ये श्रृंखला जारी है... देखती हूँ मेरा नाम आता है कि नहीं :-) ( मजाक कर रही थी...)
    वैसे मैं आपकी साफगोई की प्रशंसक हूँ...

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  16. शिकायत करने जा रही थी कि इतनी छोटी पोस्ट क्यूँ ??..तब तक लोगों के कमेन्ट से पता चला कि मैने "जारी' शब्द देखा ही नहीं...
    बड़ी रोचक यात्रा है....आगे और भी मजेदार संस्मरण पढने को मिलेंगे...प्रतीक्षा में हूँ

    और हाँ दिव्या एवं प्रवीण पाण्डेय जी जैसी कुशलता तो मुझमे भी नहीं....जहाँ किसी बात का जबाब देना हो तभी जबाब देती हूँ.....सबका कहाँ कर पाती हूँ? कुछ लोगों को इसकी शिकायत भी है...पर अब क्या करूँ...:(

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  17. हम जयपुर के नहीं हैं मगर संस्मरण बहुत अच्छा लगा!

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  18. दिलचस्प रहा यह जानना की कैसे तकनीकी-भीरु समय-समाज ( इसे किसी व्यक्तिगत आक्षेप की तरह मत लीजिएगा , ऐसी करबद्ध विनती है ...) कोई व्यक्ति शनैः शनैः तकनीकी के संपर्क में आता है , कभी झिझक , कभी कौतूहल , कभी रहस्य , कभी उत्साह ,,, आदि विविध सोपानों से गुजरता हुआ धीरे धीरे माध्यम की सकारात्मकता से अवगत होता है , फिर उपयोगिता समझ में आती है .... और फिर लेखन का एक अटूट सिलसिला चलता है ! व्यक्ति तकनीकी में सहज होने लगता है !

    आपकी ब्लॉग-यात्रा की एक-वार्षिकी के कतिपय प्रविष्टि-प्रस्थान-बिंदु मुझ से कनिष्ठ ब्लोगरों के अनुभव-वृद्धि-हेतु बनेंगे , ऐसी कामना करता हूँ ! आभार !

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  19. इस दिलचस्प यात्रा में आप और आगे बढ़े यही शुभकामनाएं

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  20. बहुत अच्छी लगी आप की यात्रा धन्यवाद

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  21. कमाल है हम जयपुर से नही हैं हद तो इस बात की है कि हम आसपास से भी नही हैं। चलिये इसी बहाने आपका तो पता चला।

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  22. साल पूरा करने की बधाई। लिखती चलिये।

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  23. ब्लॉग यात्रा संस्मरण और आभार व्यक्त करने का आपका यह तरीका बहुत अच्छा लगा |आप निरंतर लिखती रहे हम पढ़ते रहे |एक दूसरे के विचारो में विभिन्नता होते हुए भी अधिकतर साम्यता आ ही जाती है जो अंतर्मन को ख़ुशी दे जाती है
    और जो ख़ुशी दे जाय उससे अच्छी दुनिया में क्या बात हो सकती है ?
    अनेक शुभकामनाये \

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  24. आपकी पोस्टों का अचानक कम हो जाना मुझे भी अखर रहा था आज पता चला आपकी तबियत ठीक नहीं ......उम्मीद है अब दुरुस्त हो गयी होगी ......पोस्ट से शुरूआती दौर की जानकारी मिली ......अदा जी और रश्मि जी भी तारीफ के काबिल हैं ......आगे जारी का इन्तजार है .....!!

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  25. आभार तो तुम्हारा है वाणी कि तुमने दोस्त बनने का अवसर दिया. हमेशा ही अच्छा लगता है, तुमसे संवाद करना.
    बड़ी अच्छी तरह अपनी ब्लॉग यात्रा का सफ़र लिखा...इतना कुछ सहेज कर रखा.....बहुत पसंद आया ये अंदाज़

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  26. लोग अगर 'अदा' और 'वाणी' को एक समझते हैं तो गलत क्या है...!
    सच कहना क्या यह सही नहीं है...?
    मैं सबसे देर से आई हूँ कमेन्ट करने...लेकिन जानती हूँ तू समझ जायेगी...

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