बुधवार, 23 मई 2012

शुभकामनायें देने में कैसी कंजूसी !

अभी कुछ दिनो पहले ही एक सहेली की दीदी से अचानक ही फोन पर बात हो गयी , बता रही थी कि वे जापान से कनाडा शिफ्ट करने वाली हैं , उनकी छोटी बहन यानि की मेरी सहेली भी दुबई से कनाडा शिफ्ट हो चुकी है . आजकल तो किसी भी देश /राज्य /शहर का नाम सुनो तो सबसे पहले वहां बसने वाले ब्लॉगर ही याद आते हैं . मई- जून की गर्मी की छुट्टियों में दूसरे राज्यों /शहरों मुंबई , बनारस , हैदराबाद , बिहार आदि से रिश्तेदारों का आना -जाना बना रहा , एक दो ब्लॉगर्स को तो मैंने सूचित भी किया कि आपके शहर से मेहमान आये हैं , कुछ भिजवा दे आपके या आपके परिवारजन के लिए ...ये हाल तो तब है जबकि आजतक किसी ब्लॉगर से प्रत्यक्ष मिलना हुआ नहीं और ना ही किसी ब्लॉगर मीट का हिस्सा बनी . गिरिजेश जी का आना हुआ था जयपुर , उसी समय बेटे का ओपरेशन और गिरिजेश जी का व्यस्त शेड्यूल , मिलना नहीं हुआ ...अविनाशजी के जयपुर आगमन पर भी हरि शर्मा जी का सन्देश था की आपका फोन नंबर नहीं था , आपको ब्लॉगर मीट का निमंत्रण देना चाह रहे थे ...मैंने बताया उन्हेंशायद मेरा आना भी नहीं होता , कुछ और व्यस्तताएं और कुछ हालात ऐसे थे , फिर कभी सही ...चाहे -अनचाहे ब्लॉग दुनिया का असर होता ही है ...

एक बड़े ब्लॉगर भी जब- तब शिकायत कर देते हैं , आप बहुत सावधानी बरतती हैं , वास्तव में बात सावधानी बरतने जैसी नहीं है , ब्लॉगिंग से सम्बंधित बातचीत तो ब्लॉग पर कमेन्ट या ईमेल/चैट के जरिये हो ही जाती है . लेखन से जुड़े कारणों से दो -तीन महिला ब्लॉगर्स (जो मैंने उन्हें महिला जानकर ही दिया है) और पब्लिकेशन हाउसेज के पास मेरे फ़ोन नंबर , पता हैं भी . अब आप इसे सावधानी , पिछड़ापन , दकियानूसी कुछ भी कहें मगर सच यह है कि बहुत आलसी हूँ मैं , घर- गृहस्थी , ब्लॉगिंग के बाद इतना समय भी नहीं बचता कि इससे इतर आभासी रिश्ते ज्यादा निभाए जा सकें . क्या फायदा है , एक हजार लोगों से मित्रता करो और एक से भी ठीक से निभें नहीं ,बात ईमेल और चैट के द्वारा हो ही जाती है ...

कल रचनाजी ने पोस्ट पर चुटकी ले ही ली सतिशजी की पोस्ट पर मेरे कमेन्ट का हवाला देते हुए ," मत डरो वाणी , तुम्हे कौन सा कमेन्ट पाने के लिए ब्लॉगर मीट में शामिल होना है "...कुछ दिनों पहले ही पहली बार उनकी प्रोफाइल नजर आयी , गूगल प्लस पर उनके इनविटेशन के साथ ...मुझे वहां बुलाकर खुद नदारद हैं , हालाँकि रचना सिंह के नाम से उनकी एक प्रोफाइल और भी नजर आ रही है वहां , जहाँ वे सक्रिय हैं ....ये ख़ास अदा है उनकी ,फिर भी मेरी मदद करती रहती हैं . अभी पिछले दिनों ब्लॉग पर कुछ परेशानी होने पर उनकी मदद ली क्योंकि उससमय वही ओनलाईन नजर आ रही थीं , और उन्हें टेक्नीकल जानकारी भी हैं , जब मैंने अपनी टेक्नीकल अनभिज्ञता के बारे में बताया तो हंसने लगी मुझ पर की मैं सबको बता दूंगी की तुम्हे टेक्नीकल नहीं आता है ...
बता दीजिये , वैसे भी सभी को पता है  , मुझे कुछ नहीं आता है... मेरी मुस्कराहट भी शामिल थी !

मुझे लगता है , आपके बारे में सबको सब पता होता है या छिपाने के लिए ज्यादा कुछ नहीं होता तो तो बहुत सारी मुश्किलें आसान हो जाती हैं , वैसे भी मुझसे ज्यादा छिपाना होता नहीं है , माँ पर तो नाराज होती हूँ , मगर लोगों पर सहज ही विश्वास कर लेने का गुण/अवगुण या कीटाणु मुझमे भी कम नहीं और आभासी दुनिया में जब कोई माँ , दीदी कहकर पुकारे तो उस पर अविश्वास का क्या कारण बनता है, अलग से कहना क्या है , समझना क्या है , सभी सब जानते हैं यहाँ ..ज्यादा कुछ कहना नहीं चाहती हूँ क्योंकि अपने रिश्तों का तमाशा बना देने या किसी की कमजोरी या विफलता का मखौल उड़ाने जैसी जैसी काबिलियत या संस्कार मुझमे नहीं है ...

ब्लॉगर्स के बीच शब्दों ,व्याकरण अथवा टायपिंग की गलती हो या किसी कविता या लेख को आधार बना कर खिल्ली उड़ाना भी खूब होता रहा , तुरन्त जवाब देना मेरी आदत नहीं , जान बूझ कर इग्नोर करती रही , और जवाब देना भी क्या था , जो गलतियाँ थी लेखन वे वे तो थी/हैं ही ....मगर वहीं कुछ ब्लॉगर्स ऐसे भी हैं जिन्होंने हर हाल में मेरा साथ दिया और प्रोत्साहित करते रहे ...जब तक लिखती रहूंगी , मैं उन्हें नहीं भूलूंगी ...नाम नहीं लिख रही हूँ उनका , क्योंकि जिन्होंने प्रोत्सहित किया, वे स्वयं जानते हैं , ईश्वर उन्हें बुरी नजरों से बचाए रखे !

और जब आपको अपना उद्देश्य साफ़ नजर आ रहा हो तो किसी बात से कोई फर्क पड़ता भी नहीं है ....ब्लॉगिंग पर आने का मेरा उद्देश्य अब मुझे बिक्ल्कुल साफ़ नजर आ रहा है , मेरा सफ़र आत्माभिव्यक्ति से लेखन की गुणवत्ता की ओर बढ़ रहा है , ऐसा आभास होता है मुझे और मैं इसी दिशा में प्रयासरत हूँ ...मुझे लेखिका ही बनना है !  अपनी लेखन सीमाओं में मैं कहानी /गीत / ग़ज़ल आदि लिखना चाहती हूँ या सिर्फ यही लिख सकती हूँ !

जानती हूँ बहुत मुश्किल है , मगर यह तय है की मुझे इसी राह पर आगे बढ़ना है ...जितनी भी मोहलत दे जिंदगी , मुझे लिखना है और मैं प्रयासरत रहूंगी !

अब इतना कुछ लिखने की जरुरत इस लिए पड़ गयी क्योंकि हाल ही में देखा डैशबोर्ड पर , दो वर्ष और दो सौ पोस्ट का सफ़र कुछ समय पहले ही पूरा हो चुका था ...

बधाई और शुभकामनायें तो देंगे ही ना आप !

अग्रिम आभार !

51 टिप्‍पणियां:

  1. 2 वर्ष और 200 पोस्ट होने की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  2. नमक जितनी शुभकामनायें .... क्योंकि नमक के बिना स्वाद कहाँ . और रही आपकी कलम तो उसकी अहमियत लोग जानते हैं और टेक्नीकल जानकारी तो डंके की चोट पर बता दूँ कि मेरे जितना बेवकूफ कोई नहीं , लेकिन फिर भी मैं खुद को सिखानेवाले गुरु बच्चों को सिखाने लगती हूँ .... बड़ा मज़ा आता है तब

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  3. @ जब आपको अपना उद्देश्य साफ़ नजर आ रहा हो तो किसी बात से कोई फर्क पड़ता भी नहीं है ....

    *** मैं जब ब्लॉगिंग में आया तो कुछ इसी तरह के भाव थे। आज भी हैं ...

    ब्लॉग जगत की भेड़चाल से दूर अपनी राह पर चलता चला गया। और मेरे सामने रह कर यह प्रेरक पंक्ति मेरा हौसला बढ़ाती रही ...

    जोदी तो डक शुने केऊ ना आशे तबे एकला चलो रे!

    अगले महीने दो साल हम भी पूरे कर ही लेंगे।

    पुनः

    ब्लॉगजग्त में 365 दिन की एक नई यात्रा फिर से शुरू होती है। आपकी ये यात्रा मंगलमय और खुशियों से भरी हो। आप अपने उद्देश्य में क़ामयाब हों!!

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  4. @ रश्मि प्रभाजी , संगीताजी ,वंदनाजी ,हरकीरत , रंजनाजी , शेफाली पाण्डेय , रश्मि रविजा , रूपचंद्र शास्त्री जी , हिमांशु , गिरिजेश राव , समीरजी, अनुरागजी, वर्षा जी, मनोज जी ,ललित जी,प्रेमचंदजी , सतीश सक्सेना जी ...इन सबके जैसा ही लेखन!

    *** मेरा भी नाम शामिल कर दिया ...?!
    कुछ और जिम्मेदारी बढ़ा दी।

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  5. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  6. पहले तो दौ सौ का आंकड़ा पार करने की औपचारिकता -बधाई!

    १-"ये हाल तो तब है जबकि आजतक किसी ब्लॉगर से प्रत्यक्ष मिलना हुआ नहीं और ना ही किसी ब्लॉगर मीट का हिस्सा बनी ."
    सच यह है आप लोगों से मिलना ही नहीं चाहती -मुगलिया काल की निपट घरेलू महिला हैं.... :)
    २-"रश्मि प्रभाजी , संगीताजी ,वंदनाजी ,हरकीरत , रंजनाजी , शेफाली पाण्डेय , रश्मि रविजा , रूपचंद्र शास्त्री जी , हिमांशु , गिरिजेश राव , समीरजी, अनुरागजी, वर्षा जी, मनोज जी ,ललित जी,प्रेमचंदजी , सतीश सक्सेना जी ...इन सबके जैसा ही लेखन!"
    इन सभी शख्सियतों को बधाई,यद्यपि कई तो अब गुमनाम हैं और कईयों का मुझे पता नहीं है ...कहीं यह भी तो कोई ग्रुप नहीं बन रहा है ? इसमें कभी आपकी हर दिल अजीज रहीं एक मशहूर ब्लॉगर भी सम्मिलित नहीं हैं ...
    और मुझे अपनी औकात भी बताने के लिए आभार !

    ३-आप और रचना जी का पवित्र मन मैं कुछ रिफार्मेशन चाहता हूँ -पर शायद यह संभव नहीं है ....आई रिजाईन !

    4-सम्बन्ध शब्द ही आभासी होने का बोध नहीं कराता ....
    5-बिना परिणाम की आशा किए कर्म करते रहना ही मनुष्य के वश में है -इसका सदा ध्यान रखना चाहिए!
    आप इस टिप्पणी को प्रकाशित कर पाने की मानसिकता वाली नहीं है इस आशंका से इसे सुरक्षित भी कर रहा हूँ -ताकि सनद रहे !

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  7. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  8. अरे वाह!
    लीजिए न ढेर सारी शुभकामनाएँ!
    200 पोस्ट पूरी होने पर बहुत-बहुत बधाई!

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  9. आपने बहुत अच्छा लिखा है.
    वस्तुतः अपना लिखा-पढ़ा ही काम आता है. नेटवर्किंग करके आप दो-चार कमेन्ट ज्यादा पा लेंगे पर वह स्वतः नहीं होता इसलिए ऐसी चीज़ नहीं जिसके लिए परेशान हुआ जाए. मैं आपको जब-तब पढ़ता रहता हूँ, आप भेड़चाल से हटकर बढ़िया लिखनेवालों में अग्रणी हैं.

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  10. @ अरविन्दजी ,
    मुझे अपनी औकात भी बताने के लिए आभार ! ...

    क्या है ये ...आप विज्ञानं विषय पर लिखते हैं , जिस पर मैं नहीं लिख सकती हूँ , बस इसलिए आप या आप जैसे दूसरे लेखकों का नाम यहाँ नहीं है ...
    विचारों में मतभेद हो सकते हैं , लेकिन आपके लिए मेरे दिल में बहुत सम्मान है , इतने दिन तक यहाँ टिके रहने में आपका योगदान भी कम नहीं है , कई बार पोस्ट पर कुछ कंफ्यूजन होने पर आपने भी मदद की है , आपकी मदद को मैं भुला नहीं सकती हूँ मैं विश्वासघातियों में से नहीं हूँ !
    @ हाँ , अदा का नाम तो रह ही गया , क्योंकि वो भी आजकल गुमनाम ही लग रही हैं , उसके सम्बंधित पोस्ट आवाज़ और संवाद से भी गायब है !

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  11. @ और आपको ऐसा क्यों लगा , की मैं इस टिप्पणी को प्रकाशित नहीं करुँगी . मैं सिर्फ उसी टिप्पणी को हटती हूँ , जिससे विवाद बढ़ने की संभावना होती है .

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  12. ढेरों शुभकामनायें आपको इस लेखन यात्रा की।

    @और जब आपको अपना उद्देश्य साफ़ नजर आ रहा हो तो किसी बात से कोई फर्क पड़ता भी नहीं है ....ब्लॉगिंग पर आने का मेरा उद्देश्य अब मुझे बिक्ल्कुल साफ़ नजर आ रहा है , मेरा सफ़र आत्माभिव्यक्ति से लेखन की गुणवत्ता की ओर बढ़ रहा है , ऐसा आभास होता है मुझे और मैं इसी दिशा में प्रयासरत हूँ ...मुझे लेखिका ही बनना है !

    ये शानदार है, मंगलमय हो!

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  13. ईश्वर आपको और आपके शुभचिंतकों को बुरी नज़र से बचाए ! दो वर्ष पूरे करने के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं !

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  14. वाणी जी
    बहुत बहुत बधाई , दो साल से आप यहाँ "suffer" कर रही हैं और अब नौबत आप को reform करने तक आ ही गयी हैं ।

    शायद मेरी तरह ५ साल तक "suffer" करने के बाद भी स्थिति यही रहेगी क्युकी कुछ लोग यहाँ ब्लॉग लिखने का नहीं व्यक्तिगत आक्षेपों का अजेंडा लेकर टीप देते हैं ।


    ख़ैर एक पूरा paragraph मेरे ऊपर हैं इस बार , एक साल ख़तम होने पर आप ने महज एक लाइन दी थी । तीसरे वर्ष की पोस्ट पर मेरे ऊपर पोस्ट हो आप से सम्बन्ध इतने प्रगाढ़ हो जाए बिना मिले यही कामना हैं ।

    मेरी अदा पर ना जाए उसके कारण हैं कभी ऑनलाइन होगी तो बता दूंगी ।

    आप को शुभकामना देने में कंजूसी , उफ़ ये तो ना इंसाफी होगी

    वाणी की ज्ञान वाणी
    लोगो को छूती रहे
    सफ़र शब्दों का चलता रहे
    मिलना हो ना हो
    मकसद हमारा मिलता हैं
    बस दिल को सुकून हैं
    की क़ोई हैं
    जो जानता हैं की
    समय असमय मै हूँ
    और रहूंगी

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  15. नाम नहीं लिख रही हूँ उनका , क्योंकि जिन्होंने प्रोत्सहित किया, वे स्वयं जानते हैं , ईश्वर उन्हें बुरी नजरों से बचाए रखे !

    oh my god
    this means i am unsafe and so are रश्मि प्रभाजी , संगीताजी ,वंदनाजी ,हरकीरत , रंजनाजी , शेफाली पाण्डेय , रश्मि रविजा , रूपचंद्र शास्त्री जी , हिमांशु , गिरिजेश राव , समीरजी, अनुरागजी, वर्षा जी, मनोज जी ,ललित जी,प्रेमचंदजी , सतीश सक्सेना

    evil eye destruction process i have initiated

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  16. दो वर्ष और डबुल सैंकड़े मुबारक हों, ये साधना जारी रखें, संघर्ष/सुधार तो चलता ही रहता है।

    और निशांत जी की बात दोहराने की इच्छा है , “... नेटवर्किंग करके आप दो-चार कमेन्ट ज्यादा पा लेंगे पर वह स्वतः नहीं होता इसलिए ऐसी चीज़ नहीं जिसके लिए परेशान हुआ जाए.”

    पुनः बधाई ! / ~ अमरेन्द्र

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  17. बधाई! आप को।
    और रचना जी को भी,
    उन्हों ने नाम के आगे जी लगाना तो सीखा।

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  18. सबसे पहले 2 वर्ष और 200 पोस्ट होने की हार्दिक शुभकामनाएं।

    टैक्नीकल जानकारी मे तो हम भी अनाडी हैं वाणी जी …………हम सब एक ही राह के मुसाफ़िर हैं। जहाँ तक ब्लोगर मीट की बात है तो उसके बाद तो और भी टिप्पणियाँ आनी बंद हो जाती हैं क्योकि लोग जानने लगते है तो कमेंट देना ही बंद कर देते हैं मेरे साथ तो ज्यादातर यही हुआ उससे पहले तो काफ़ी लोग आते थे मगर जब से बेचारे जानने लगे दूर भागने लगे………हा हा हा …………मगर हम कहाँ मानने वाले है हम तो लिखेंगे जी कोई आये ना आये…………हा हा हा…………बस आप भी सफ़र पर चलती रहिये और अब इस आंकडे को 2000 तक पहुंचाइये यही हमारी कामना है।

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  19. शुभ कामनाएं देने में कोई कंजूसी नहीं ... दो साल और दो सौ रचनाओं का आंकड़ा पार करने पर बहुत बहुत बधाई ..

    मेरे लेखन को आप पसंद करती हैं ..जान कर सुकूँ मिला ..पर सच ही और ज़िम्मेदारी बढा दी है ... पर मैं तो बस मन का ही सुनती हूँ ... और वही कुछ उल्टा सीधा लिख देती हूँ ..
    सच तो यह है कि ब्लॉग पर लिखने के लिए मिलना ज़रूरी नहीं है .. और मुलाक़ात को ब्लॉगर्स मीट कहना भी उचित नहीं है .. एक दो लोंग जो आपस में मिलने का वक्त निकाल लेते हैं उसे आपसी मेल मुलाक़ात ही समझना चाहिए ..मनुष्य सामाजिक प्राणी है तो जिनसे बात चीत नेट पर होती है उनसे मिलना भी चाहता है ..इसमे मुझे कोई बुराई तो नज़र नहीं आती ..कभी जयपुर आना हुआ तो मैं भी तुमसे मिलना चाहूंगी .. :):)

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  20. वाणीजी
    बहुत बहुत बधाई \आप निरंतर लिखती रहे |अनेक शुभकामनाये |

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  21. दिनेश जी,
    रचना ने जी लगाना नहीं सीखा है। ऊपर से कॉपी-पेस्ट किया है।
    वाणीगीत को अपनी तरफ से भी बधाई।
    अरे हां, आपका 200 का आंकडा देखकर याद आया कि मैं भी 300 को पार कर चुका हूं और अभी तीन दिन पहले ही किया है। मेरे तो ध्यान में ही नहीं था।

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  22. वाणी....आपको शुभकामनाएँ देने में कंजूसी बिल्कुल नहीं....बहुत कुछ ऐसा पढ़ा जो ठंडी बयार सा मन को शीतल कर गया.दो साल और दो सौ पोस्ट पूरी होने पर ढेरों शुभकामनाएँ....

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  23. बहुत-बहुत बधाई के साथ शुभकामनाएं आप यूं ही निरंतर लिखती रहें ... आभार ।

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  24. ये सफ़र अनवरत चलता रहे...ढेर सारी शुभकामनाएं और सैकड़ों बधाइयां

    मेरा नाम लेकर तो शर्मिंदा ही कर दिया...इस साल अब तक सिर्फ एक कहानी लिखी है....तुम्हारा लेखन आत्मभिव्यक्ति से लेखन की गुणवत्ता की तरफ बढ़ रहा है...और मेरी लेखनी रिवर्स में चल रही है..:(:(

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  25. दो वर्ष और दो सौ पोस्टों की बधाई ! मिली तो मैं भी दो-चार लोगों से ही हूँ, पर मुझे नहीं लगता कि इससे कोई फर्क पड़ता है. ब्लॉग लिखना मेरे लिए भी आत्माभिव्यक्ति का ही साधन है, प्रसिद्द होना, लोकप्रिय होना या नेटवर्क बढ़ाना नहीं. इसीलिये जब समय मिले तभी लिखती हूँ. कुक दिन से ब्लोगर पर आयी ही नहीं तो सुना कि बहुत कुछ घट गया इस बीच.
    खैर क्या फर्क पड़ता है?
    मैं आपसे भी कभी मिली नहीं हूँ, पर जाने क्यों नेह का नाता सा लगता है. और भी बहुत से लोगों से है. आप मुझे बहुत निर्भीक लगती हैं और आपके इस गुण की मैं कायल हूँ.

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  26. :)
    इस छोर से केवल शुभकामनाएं !

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  27. आपको दो साल और दो सौ पोस्ट पूरी करने की बहुत-बहुत बधाई! आगे के लिये शुभकामनायें! :)

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  28. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  29. दो वर्ष और दो सौ पोस्ट का सफ़र बहुत नाइंसाफ़ी है ये तो, कम से कम दो वर्ष और चार सौ पोस्ट का सफ़र होना चाहिये था.:) फ़िर भी आपको हार्दिक बधाईयां और शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  30. जहां तक पसंद नापसंद, मिलने ना मिलने का सवाल है तो मेरी समझ से ये हर ब्लागर अपना निजी मामला है. कुछ लोगों में आपसी समझ का स्तर मेल खाता है उनमें अच्छे और व्यक्तिगत मेल मुलाकात तक सामान्य सी बात है. ब्लागिंग इंसान करता इसी लिये है कि उसे अपनी पहचान सार्वजनिक करने या छुपाने की संपूर्ण आजादी है.

    उपर की टिप्पणी को सामान्य सी मजाक ही समझे, दो सौ पोस्ट लिखना भी कोई साधारण बात नही है, फ़िर से हार्दिक शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  31. vani ji bahut bahut badhayi is ankde ko prapt karne par aakhir aapne 100 out of 100 liye hain to badhayi to banti hai bhai. aur jo uddeshey banaya hai aapne usi ko prapt karne ke liye prayrat rahe aur safalta paye yahi dua hai.

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  32. दो वर्ष और २०० पोस्ट की बहुत बहुत बधाई वैसे मैं आपकी बात से इत्तफ़ाक रखता हूँ जब हम किसी को कहते है हेप्पी निउ इअर तो वह कहता है सेम टू यू यानि जितनी आपने दी उतनी ही मैंने दी है :)

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  33. @ कविता का अलग ब्लॉग बना लिया है , वहीँ ज्यादा सक्रिय रही हूँ इसलिए यहाँ आंकड़ा कम है !

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  34. दोहरी बधाई! वैसे ताऊ की नाइंसाफ़ी वाले शिकवे में हमें भी शामिल मानिये। लो प्रोफ़ाइल रहना किसी की प्रकृति, आवश्यकता और मजबूरी कुछ भी (या सभी) हो सकते हैं। तो भी, मेल-मिलाप के बहुत से लाभ भी हैं। यथा: कई बार व्यक्ति की बेहतर पहचान, साक्षात्कार होने पर ही हो पाती है क्योंकि वह व्यक्ति भी किसी कारणवश अनदेखे लोगों को अपने बारे में अधिक जानकारी नहीं देना चाहता है। मेरी नज़र में व्यक्तिगत पहचान होने का एक नुक्सान उन लोगों से/को है जो अपने-पराये का भेद मानते हैं और इन दो वृत्तों के साथ अलग-अलग व्यवहार रखते हैं। पहचान होते ही आप स्वतः उनके वृत्त की सदस्यता पा लेते हैं, जबकि असलियत में दूरी/तकल्लुफ़ बने रहना बेहतर था। ऐसे बहुत से लोग मेरे आदर्श हैं जिनसे मैं (वर्तमान शरीर में) कभी मिल ही नहीं सकता - मगर परिचय अगर सीमित करने वाला हो तो उसका उपयोग ही क्या? व्यक्ति की पहचान एक ऐसी कला है जिसे हम जीवन भर सीखते हैं और फिर भी गलत सिद्ध हो सकते हैं क्योंकि व्यक्ति बदलते हैं, मन चलायमान है, और सही-गलत का अर्थ भी देश-काल-बहुमत के सापेक्ष बदलता है। कई बार इंसान बुरा नहीं होता मगर बुरा कहलाता है क्योंकि हमारी स्वार्थसिद्धि में आडे आता है, लेकिन कई लोग तो आदतन खडे ही आडे होते हैं। सामाजिक प्राणी होते हुए भी अंततः हर व्यक्ति अकेला ही है और अकेलेपन का आदर होना चाहिये।

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  35. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  36. @ अरविन्दजी ,
    मुझे अपनी औकात भी बताने के लिए आभार ! ...

    क्या है ये ...आप विज्ञानं विषय पर लिखते हैं , जिस पर मैं नहीं लिख सकती हूँ , बस इसलिए आप या आप जैसे दूसरे लेखकों का नाम यहाँ नहीं है ...
    विचारों में मतभेद हो सकते हैं , लेकिन आपके लिए मेरे दिल में बहुत सम्मान है , इतने दिन तक यहाँ टिके रहने में आपका योगदान भी कम नहीं है , कई बार पोस्ट पर कुछ कंफ्यूजन होने पर आपने भी मदद की है , आपकी मदद को मैं भुला नहीं सकती हूँ मैं विश्वासघातियों में से नहीं हूँ !
    @ हाँ , अदा का नाम तो रह ही गया , क्योंकि वो भी आजकल गुमनाम ही लग रही हैं , उसके सम्बंधित पोस्ट आवाज़ और संवाद से भी गायब है !

    मेरा जवाब :
    क्या मैं सचमुच केवल विज्ञान विषय पर ही लिखता हूँ ? आप ने तो क्वचिदन्यतोपि के मेरे स्वल्प अवदान पर भी झाडू फेर दिया: कितना हतोत्साहित हुआ हूँ मैं :(
    मैं आपके किसी आम आ सका और आपने यह अभिव्यक्त भी किया ,कृतज्ञ हुआ मैं !

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  37. 2 वर्ष और 200 पोस्ट होने की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  38. दो साल
    और
    दो सौ रचनाओं का आंकड़ा
    पार करने पर बहुत बहुत बधाई

    शुभकामनाएं

    हम तो वैसे भी कंजूस नहीं :-)

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  39. द्विवेदी जी की चुटकी पसंद आई
    लेकिन लगता है
    'सन्दर्भ' कॉपी-पेस्ट का कमाल है

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  40. दो साल और दो सौ पोस्ट की बहुत बहुत बधाई वाणी जी!

    नेटवर्किंग और तमाम तिकड़मों से दूर रहने की जो आपने बात कही वही असल लेखन की जरूरत भी है क्योंकि इन सब चीजों से दूर रहते हुए लेखन करने के कारण अंदरूनी खुशी मिलती है, एक तरह का सूकून प्राप्त होता है।

    आपके द्वारा किया गया कहीं एक कमेंट पढ़ा था कि - "ब्लॉगिंग में टिके रहने के लिये थोड़ा सा ढीठ भी होना पड़ता है".....अब भी याद है मुझे :)

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  41. दो साल में दो सौ पोस्ट --बहुत बहुत बधाई ।
    अपने लेखन से संतुष्ट होना चाहिए । बाकी सब बेमानी है ।

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  42. @ अरविन्दजी ,
    मैं सिर्फ गीत , ग़ज़ल , कहानी , संस्मरण आदि लिखती हूँ और आप ये सब नहीं लिखते , बस मेरा यही मतलब था ...

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  43. @ सतीश जी ,
    जी हाँ , मैंने यही लिखा था की वास्तविक जीवन में जीने के लिए और आभासी दुनिया में टिके रहने के लिए ढीठ होना पड़ता है !

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  44. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  45. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

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