ज्ञानवाणी
दिल दिमाग की रस्साकशी
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रविवार, 14 मार्च 2010
केवल तुम हो ...तुम
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तुम अपरिचित थे बुरे नहीं भले लगे थे किन्तु ह्रदय में एक भी बुलबुला नहीं फूटा कि दृष्टि उठा कर तुम्हे देख लूं तब ना जाने कौन ...
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शनिवार, 20 फ़रवरी 2010
ये बेचारे (??) पति
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ये बेचारे पति .... इनको समझने के लिए खुशदीप जी के दस commandents की कोई आवश्यकता नहीं ...दरअसल इन्हें समझने की ही जरुरत कहाँ पड़ती है ...फ...
61 टिप्पणियां:
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