ज्ञानवाणी

दिल दिमाग की रस्साकशी

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बुधवार, 9 जुलाई 2014

द्विरागमन .... (2)

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मुझे लगता था कहीं भीतर से आती उसकी आवाज - तुम सब कुत्ते ही होते हो , सब एक जैसे।  गोश्त चूस लेने के बाद हड्डियां चुभलते रहने वाले कुत...
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सोमवार, 4 अक्टूबर 2010

जिंदगी का सफ़र .....

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जब कभी कभी रेल में सफर करने का मौका मिला ... एक ख़याल हमेशा रूबरू रहा ... जिंदगी का सफर भी तो बिल्कुल रेल के सफर के मा...
22 टिप्‍पणियां:
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