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दिल दिमाग की रस्साकशी
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मंगलवार, 28 फ़रवरी 2012
छोटी पहचान लम्बा इंतज़ार....
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उबासियाँ लेते हुए मेनगेट का लॉक खोला और उसने एक लम्बी सांस ली . सुबह की ताजा हवा की ठंडक कलेजे तक भर गयी . पेड पौधों को निहारते पीले गुलाब ...
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बुधवार, 16 मार्च 2011
बहारें फिर भी आती हैं ...बहारें फिर भी आएँगी ....
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परीक्षाओं का घनघोर माहौल बना हुआ है घर में ...पतिदेव के एम बी ए की परीक्षाएं बस अभी ख़त्म हुई है , बच्चों को अभी फ्री होने में थोडा समय लग...
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शुक्रवार, 30 अप्रैल 2010
डायरी में दर्ज एक शाम ...
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हाथ में चाय की प्याली लिए सूरज को ढलते हुए देखना...अपनी छत से ही सही ....मुझे बहुत रूमानी -सा लगता है ...शाम के समय जब दूर क्षितिज में ...
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सोमवार, 12 अक्टूबर 2009
डायरी का पुराना पन्ना
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कैसे होते हैं वे साथी जो रुलाते नही ....तडपाते नही ....ना हम उनके लिए कोई सपना देखते हैं ...ना ही उनका साथ पाने की आरजू....पर दिल तब भी उन्ह...
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