ज्ञानवाणी

दिल दिमाग की रस्साकशी

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रविवार, 16 दिसंबर 2012

रूठना कोई खेल नहीं !

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तुम  ही  हो माता ,पिता तुम  ही हो ! तुम ही हो बन्धु ,सखा तुम ही हो ! प्रार्थना के बीच अधमुंदी आँखों से सुनीता ने अपनी पीछे  की लाईन मे...
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