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दिल दिमाग की रस्साकशी
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बुधवार, 4 सितंबर 2013
बहुत कुछ दुनिया में यूँ ही होता है निःस्वार्थ !!
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कल सुबह पेड़ पौधों को निहारती फुर्ती से कदम बढ़ाती एक महिला जाते -जाते मुड़ कर आई और गुड़हल के फूलों की और इशारा करते हुए बोली। क्या आ...
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