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बुधवार, 4 सितंबर 2013
बहुत कुछ दुनिया में यूँ ही होता है निःस्वार्थ !!
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कल सुबह पेड़ पौधों को निहारती फुर्ती से कदम बढ़ाती एक महिला जाते -जाते मुड़ कर आई और गुड़हल के फूलों की और इशारा करते हुए बोली। क्या आ...
30 टिप्पणियां:
शुक्रवार, 12 मार्च 2010
ना ....अब बचपन ...ना .....!!
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ना अब बचपना अब बचपन ना बहुत हुआ बचपन पर हँसना अब हँसना ना अब हँस ना ......!! बचपन कब चाहे बड़ा होना मगर जब बड़ा होना तो बड़ा हो ना ......
21 टिप्पणियां:
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