ज्ञानवाणी

दिल दिमाग की रस्साकशी

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बुधवार, 16 सितंबर 2009

बे - बहर ख्याल

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ख्याल कुछ बे - बहर से तन पिंजर मैं कैद सही भीतर मन आजाद है छितराए से हैं पंख बहुत बेखौफ मगर परवाज़ है थके रु...
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