ज्ञानवाणी

दिल दिमाग की रस्साकशी

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रविवार, 13 दिसंबर 2009

सपूत......एक लघु कथा

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पुराने ज़माने की बात है ....तब आज की तरह पानी के लिए नल और बोरिंग जैसी सुविधा नही थी ....सिर पर कई घड़ों का भार लिए स्त्रियाँ कई किलोमीटर दू...
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