ज्ञानवाणी

दिल दिमाग की रस्साकशी

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शुक्रवार, 9 मई 2014

रोशनी है कि धुआँ..... (8 )

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मध्यम वर्ग में पली बढ़ी तेजस्वी अपने तेज के दम पर ही आगे बढती आयी है , कार्यालय की मुसीबतों से लड़ कर विजयी होते इस बार उसने लडाई लड़ी अ...
21 टिप्‍पणियां:
शनिवार, 19 अप्रैल 2014

रोशनी है कि धुआँ..... (7)

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अपने नाम को सार्थक करती तेजस्वी लौटी अपने शहर , उसकी सहेली सीमा की जिंदगी में आये तूफ़ान से रूबरू हो रही है ,  झिझकते , सिसकते , रोते सीमा ...
11 टिप्‍पणियां:
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