ज्ञानवाणी
दिल दिमाग की रस्साकशी
मित्रता
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
मित्रता
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
मंगलवार, 22 जुलाई 2014
द्विरागमन ....(3)
›
अपने जीवन की परेशानियों से निबटता एक सैनिक जा बैठा हरे भरे पार्क की एक बेंच पर , उसी बेंच से कुछ दूर मखमली दूब पर तिनके कुतरती एक स्त्र...
19 टिप्पणियां:
सोमवार, 6 जनवरी 2014
रोशनी है कि धुआँ .... (4 )
›
(तेजस्वी की कहानी को कम में समेटना चाहती थी , मगर नए किरदार जुड़ते जा रहे हैं , कैसे लिखोगी कम में , हमें अनसुना कर ! यह कहानी उपन्यासिक...
17 टिप्पणियां:
सोमवार, 23 दिसंबर 2013
रोशनी है कि धुआँ ….. (3)
›
अब तक … अपने सपने की तलाश ने तेजस्वी को " वायब्रेंट मिडिया हाउस " पहुंचा दिया है। पत्रकारिता को अपना जूनून माने वाली तेज...
19 टिप्पणियां:
रविवार, 16 दिसंबर 2012
रूठना कोई खेल नहीं !
›
तुम ही हो माता ,पिता तुम ही हो ! तुम ही हो बन्धु ,सखा तुम ही हो ! प्रार्थना के बीच अधमुंदी आँखों से सुनीता ने अपनी पीछे की लाईन मे...
32 टिप्पणियां:
गुरुवार, 25 मार्च 2010
विपत्ति कसौटी जे कसे सोई सांचे मीत .....
›
जीवन एक संग्राम ही तो है । जिसमे समय समय पर विभिन्न विपत्तियाँ आती हैं । इन विपत्तियों में ही परम मित्र की सत्यता प्रमाणित होती है । पंचतंत्...
14 टिप्पणियां:
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें