ज्ञानवाणी

दिल दिमाग की रस्साकशी

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शुक्रवार, 30 अप्रैल 2010

डायरी में दर्ज एक शाम ...

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हाथ में चाय की प्याली लिए सूरज को ढलते हुए देखना...अपनी छत से ही सही ....मुझे बहुत रूमानी -सा लगता है ...शाम के समय जब दूर क्षितिज में ...
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