ज्ञानवाणी
दिल दिमाग की रस्साकशी
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बुधवार, 16 सितंबर 2009
बे - बहर ख्याल
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ख्याल कुछ बे - बहर से तन पिंजर मैं कैद सही भीतर मन आजाद है छितराए से हैं पंख बहुत बेखौफ मगर परवाज़ है थके रु...
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गुरुवार, 11 जून 2009
चंद अल्फाज़
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दोस्त दुश्मन में फर्क न कर सकें ऐसे नादाँ भी हम नहीं दोस्त छुप कर वार किया करते हैं दुश्मन कलेजा चाक कर देगा ... ग़म ...
5 टिप्पणियां:
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