ज्ञानवाणी

दिल दिमाग की रस्साकशी

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शनिवार, 1 मार्च 2014

किसी ने कहा था - अपना हाथ जगन्नाथ !!

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रे ईर्ष्या! तू न गयी मन से रे . मन का क्या कहें , जितना समझाए कोई की मद , मोह , ईर्ष्या , लालच के फेर में मत पड़ रे बन्दे , मगर मन पर किस...
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