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दिल दिमाग की रस्साकशी
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गुरुवार, 3 अप्रैल 2014
भीतर भरते रहना प्रेम का ……
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उस दिन किस बारीकी से का वह बंद कोना छुआ उसने कि कोई सोया दर्द फिर से जाग उठा ...जब उसने कहा कि कुछ घाव जो सूखे बिना भर जाते हैं , ज...
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