ज्ञानवाणी
दिल दिमाग की रस्साकशी
रविवार, 2 फ़रवरी 2014
बच्चों को खूब पढ़ाया लिखाया , मगर अपनी सोच का क्या किया ……
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घर क्या होता है तुम क्या जानो तुम जानते हो जमीन के छोटे बड़े टुकड़े कमरा इतने फीट बाई इतने फीट कैसे बताऊँ - इसे घर नहीं कहते ! घर एक एहस...
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सोमवार, 6 जनवरी 2014
रोशनी है कि धुआँ .... (4 )
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(तेजस्वी की कहानी को कम में समेटना चाहती थी , मगर नए किरदार जुड़ते जा रहे हैं , कैसे लिखोगी कम में , हमें अनसुना कर ! यह कहानी उपन्यासिक...
17 टिप्पणियां:
सोमवार, 23 दिसंबर 2013
रोशनी है कि धुआँ ….. (3)
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अब तक … अपने सपने की तलाश ने तेजस्वी को " वायब्रेंट मिडिया हाउस " पहुंचा दिया है। पत्रकारिता को अपना जूनून माने वाली तेज...
19 टिप्पणियां:
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