आज करवा चौथ है ...इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया में हड़कंप मचा हुआ है ...तरकीबें और तकनीकें बताई जा रही है ...अपनी पत्नी या बहू को इस व्रत के करने पर क्या तोहफा दिया जाए ...कैसे मदद की जाए ...
हद है ...!!
एक साधारण से व्रत का क्या बाजारीकरण किया गया है ...!!
हिंदू महिलाएं ज्यादातर व्रत अपने पति की लम्बी आयु और परिवार वालों की सुख समृद्धि के लिए ही करती है फिर इस एक व्रत को लेकर इतना हंगामा क्यों ...जिसमे सबसे कम समय भूखा प्यासा रहना पड़ता है ...
राजस्थान में ज्यादातर महिलाएं वर्ष में चार चतुर्थियों पर व्रत रखती हैं ...
वैशाख , भाद्रप्रद , कार्तिक , माघ की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को यह व्रत किया जाता है ...सभी चौथ व्रत में पूजन विधि एक समान ही होती है ...बस उस व्रत में बनाये जाने वाले प्रसाद और व्रत कथा में अन्तर होता है ...इन चारों चतुर्थियों पर चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत खोला जाता है .... कार्तिक चतुर्थी को अन्य चतुर्थियों के मुकाबले चाँद पृथ्वी के सबसे करीब होता है ...इसलिए चंद्र दर्शन इस दिन सबसे जल्दी होता है ...जबकि भाद्रप्रद चतुर्थी को चंद्र दर्शन बहुत देर से होता है ...वही मुश्किल से भी ...क्योंकि बरसात का मौसम होने से बादल छाए रहते हैं आकाश में ...कभी कभी तो पूरी रात चाँद के दर्शन नही होते ...महिलाएं दूसरे दिन सूर्य का दर्शन कर अपना व्रत खोलती हैं ...तो फिर इस करवा चौथ को ही इतना हो हल्ला क्यों ...!!
करवा चतुर्थी के व्रत को लेकर और भी बहुत भ्रांतियां है ...बहुधा टेलीविजन धारावाहिकों में करवा चौथ की रस्म में चलनी से चाँद देख कर पूजा करना दिखाया जाता है ...और फिर पति की आरती भी ...क्यों भाई ...कोई रणक्षेत्र में जा रहे हैं वे ...हमारी संस्कृति में तो पति की आरती बस रणक्षेत्र में जाने पर ही होती है ...शेष अवसरों पर बहने ही आरती किया करती हैं पत्निया नही ...
करवा चतुर्थी की व्रत कथा में स्पष्ट उल्लेख है " सात भाइयों की एक ही बहन थी और उसे पहली बार व्रत करते देख भाई भाभी बहुत परेशान थे ...भूख प्यास से व्याकुल बहन को बहलाने के लिए कृत्रिम रौशनी को चलनी से दिखा कर चाँद का भ्रम दिया गया ...और इस कारण ही उसका व्रत भंग हुआ ..." जब कथा में इस प्रकार व्रत भंग हुआ तो फिर इसे प्रथा के रूप में कैसे स्वीकार किया गया ...समझ से परे हैं ...हम राजस्थानी स्त्रियाँ चाँद को चलनी में नही देखती ...ना ही पति की आरती करती हैं ...जैसा राजस्थान की संस्कृति दिखाते धारावाहिकों में दिखाया जाता है ....हाँ ...पति को चरण स्पर्श जरुर करती हैं ...!!
रही बात पति के हाथ से पानी पीकर व्रत खोलने की तो ...जहाँ बहुएं घर की बुजुर्ग महिलाओं तक से परदा करती रही हैं ...उनके सामने पति से बात तक नही करती थी ...घूँघट में रहती रही हैं ...वहां पति के हाथ से पानी पीकर व्रत खोलने जैसी रस्म किस तरह सम्भव है ...यह भी मेरी तुच्छ बुद्धि से समझ से बाहर की बात है.... राजस्थान में करवा चतुर्थी के अवसर पर घर की बड़ी महिलाएं सास , जिठाणी , ननद आदि ही पानी पिला कर व्रत खुलवाती हैं....एकल परिवार होने के कारण कई बार आस पास की बुजुर्ग महिलाएं भी यह कार्य कर देती हैं ...हाँ ...अब धारावाहिकों और फिल्मों के चलते कई घरों में पति इस प्रकार व्रत खुलवाने लगे हैं ...
प्रथाओं में समय के साथ परिवर्तन होता है ...इसमे कोई शक नही ...मगर तकलीफ तब होती है जब इसे हमारी संस्कृति के प्रचार के तौर पर दिखाया जाता है ....पति -पत्नी के स्वाभाविक प्रेम को बाजारीकरण में बदलते संस्कृति के नाम पर कूड़ा परोसते इन धारावाहिकों और फिल्मों पर मुझे तो सख्त ऐतराज़ है .....!!
करवा चतुर्थी सबके लिए शुभ हो ...मंगलकारी हो ....!!
और ...अब पति -पत्नी के संसार ,घर- बार , प्यार पर एक बहुत ही खूबसूरत गीत ..
तेरे लिए पलकों की झालर बुनूं
कलियों सा गजरे में बांधे फिरूं
धूप लगे जहाँ तुझे छाया बनूँ
आजा साजना ...तेरे लिए पलकों की ........
महकी महकी ये रात है ,बहकी बहकी हर बात है
लाजों मरूं झूमे जिया , कैसे ये मैं कहूँ
आजा साजना ...तेरे लिए पलकों की ...
नया नया संसार है , तू ही मेरा घर बार है
जैसे रखे ख़ुशी खुशी वैसे ही मैं रहूँ ,
आजा साजना .....तेरे लिए पलकों की ...
प्यार मेरा तेरी जीत हैं , सबसे अच्छा मेरा मीत है
तेरे लिए रूप लिया , तेरे लिए ही हसूँ
आजा साजना ...तेरे लिए पलकों की ...
सुने और देखे यहाँ यू टयूब के सौजन्य से
http://www.youtube.com/watch?v=dOeyU0tF0Cg
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तेरे लिए पलकों की झालर बुनूं
कलियों सा गजरे में बांधे फिरूं
धूप लगे जहाँ तुझे छाया बनूँ
आजा साजना ...तेरे लिए पलकों की ........
महकी महकी ये रात है ,बहकी बहकी हर बात है
लाजों मरूं झूमे जिया , कैसे ये मैं कहूँ
आजा साजना ...तेरे लिए पलकों की ...
नया नया संसार है , तू ही मेरा घर बार है
जैसे रखे ख़ुशी खुशी वैसे ही मैं रहूँ ,
आजा साजना .....तेरे लिए पलकों की ...
प्यार मेरा तेरी जीत हैं , सबसे अच्छा मेरा मीत है
तेरे लिए रूप लिया , तेरे लिए ही हसूँ
आजा साजना ...तेरे लिए पलकों की ...
सुने और देखे यहाँ यू टयूब के सौजन्य से
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