आधी सदी का किस्सा
लेखक - अनुराग शर्मा
अंतर्जाल का माध्यम सर्वजन के लिए सुलभ होने के बाद पूरे विश्व में ही क्रांतिकारी परिवर्तन आये हैं. कहना न होगा कि हम उस पीढ़ी के लोग हैं जिसने वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक परिवर्तन देखे हैं वह चाहे आर्थिक, सामरिक, स्वास्थ्य, शिक्षा दृष्टि से हों.
अभी इस समय में हम 2026 से गुजर रहे हैं. कई बार विचार होता ही होगा न कि अगले बीस फिर उससे आगे के वर्षों में दुनिया कैसी होगी.
"आधी सदी का किस्सा " ऐसा ही एक उपन्यास है जो वर्ष 2068 के बाद की संभावित वैश्विक गतिविधियों पर आधारित है.
प्रोफेसर गुणाकर एक तीव्र बुद्धिमान वैज्ञानिक हैं जो अपनी संकल्पना "बिग क्लाउड" को मूर्त रूप देकर सम्मानित हुए हैं. धरती और उस पर बसने वाले प्रत्येक जीव, पर्यावरण आदि की सुरक्षा और उनके लिए जीवन आसान बनाने की कल्पना और कार्य भी इस उपन्यास में दर्शाये गये हैं. अत्यधिक बुद्धिमत्ता कई बार इंसान को बहुत अकेला कर देती है. ऐसा ही कुछ प्रोफेसर गुणाकर के साथ हुआ. सार्वजनिक तौर पर विख्यात यह विद्वान अपने अकेलेपन में अपनी पुस्तकों के साथ प्रसन्न हैं जबकि उनका आविष्कार ही वह प्रमुख कारण रहा होगा जिसने पुस्तकों की महत्ता को समाप्त किया.
जैसे कि जीवन चक्र घूमता रहता है. सुख या दुख भी अदला बदली करते रहते हैं. अजेय समझी जाने वाली "बिग क्लाउड" में भी समस्या उत्पन्न होने लगती हैं.
"बिग क्लाउड "की एक तकनीकी समस्या जो पूरे विश्व के लिए बड़ा संकट बनने वाली है के निराकरण के लिए एक काबिल व्यक्ति रायन को नियुक्त किया जाता है. रायन समझता है कि इस समस्या का हल प्रोफेसर गुणाकर के पास ही संभव है क्योंकि इसके प्रणेता वही हैं. उनके पास इसकी कोई वैकल्पिक व्यवस्था अवश्य रही होगी.
रायन निर्वासित सा जीवन जी रहे प्रोफेसर तक कैसे पहुँचता है या नहीं पहुँच पाता है. बिग क्लाउड की समस्या का क्या हल निकलता है! पाठक की उत्सुकता बनी रहती है.
साइंस फिक्शन की यह कहानी पूजा ने अपनी सुमधुर स्पष्ट आवाज में भी रिकॉर्ड की है जिसे नीचे दिये गये लिंक पर सुना जा सकता है.
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फिलहाल यह पुस्तक प्रिंट रूप में उपलब्ध नहीं है. किंडल एप की सदस्यता लेकर पढ़ी भी जा सकती है.


