शनिवार, 17 अक्टूबर 2009

अरज सुनो सरकार


( दिवाली मीरा की )


एक दिया धरा देहरी पर
एक धरा पीपल की छाँव

एक धरा तुलसी के बिरवे
जहाँ मोरे कान्हा का ठाँव

तन दीपक मन बाती बारी
सज सोलह सीण्गार

खड़ी चौखट पर पंथ निहारु
कब आओगे द्वार ...!!

अरज सुणो सरकार...!!






23 टिप्‍पणियां:

  1. वाह जी, बहुत बढ़िया!!

    दिवाली की शुभकामनाएँ.

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  2. सुख औ’ समृद्धि आपके अंगना झिलमिलाएँ,
    दीपक अमन के चारों दिशाओं में जगमगाएँ
    खुशियाँ आपके द्वार पर आकर खुशी मनाएँ..
    दीपावली पर्व की आपको ढेरों मंगलकामनाएँ!

    -समीर लाल 'समीर'

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  3. तन दीपक मन बाती बारी
    सज सोलह सीण्गार
    खडी चौखट पर पंथ निहारूं
    कब आवोगे द्वार...!!

    सुंदरतम प्रार्थना. शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  4. बहुत सुंदर पुकार,
    आप का धन्यवाद

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  5. "तन दीपक मन बाती बारी ..."

    बेहद भावपूर्ण । धन्यवाद ।

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  6. दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें

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  7. इतनी निश्छल सरलता को सरकार जरूर सुनते हैं। गीता में आश्वासन भी दिया है!

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  8. सुन्दर रचना है।

    गोवर्धन-पूजा
    और भइया-दूज की शुभकामनाएँ!

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  9. एक दीया धरा देहरी पर
    एक धरा पीपल की छाँव
    एक धरा तुलसी के बिरवे
    जहां मोरे कान्हां का ठांव

    वाह...वाह....मीरा की इन पंक्तिओं ने मोहित कर लिया .....!!

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  10. मीरा की दीवाली तो तभी होगी जब श्याम आयेंगे ।

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  11. अजी अगर आप ऐसे बुलाएँगी तो सरकार का दीमाग ख़राब है जो नहीं आयेंगे....अरे आना ही पडेंगा ....
    बहुत ही लुभावनी लगी आपकी कविता..
    बधाई...

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  12. भावुकता से युक्त सुंदर अभिव्यक्ति

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  13. विरह में जो गहराई है वह आसक्ति में नहीं ।
    आग्रह भाव ही सर्वस्व का मूल है ।
    द्वापर में ले जाने के लिये आभार ।

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  14. भावपूर्ण शब्‍द रचना, बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति बधाई ।

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  15. "तम दीपक मन बाती बारी / सज सोलह सिण्गार"

    ...आह!

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  16. Kitnee mithaas hai, geet aur iskee bhashame...gun gunate hue padha....apneeaa ko zaroor padhake suaungee...

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