बुधवार, 3 जून 2009

प्यार तुम्हारा

प्यार तुम्हारा मेरे भीतर है जमी बर्फ सा
पिघल जाएगा तुम्हारा एहसास पाकर ही नदी सा
सोचा था भूल जाउंगी तुम्हे
भूल रही हूँ तुम्हे
मगर नही भ्रम था सब मेरा
आज जब देखा तुम्हे
देखा वो भी ख्वाब में
सीने में भर आया उबाल सा
आँखों में उतर आया दरिया सा
प्यार तुम्हारा मेरे भीतर है जमी बर्फ सा
पिघल गया तुम्हारा एहसास पाकर ही नदी सा

2 टिप्‍पणियां:

  1. बेहद खूबसूरत भाव और सुंदर शब्द संयोजन. बहुत शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  2. होसलाअफजाई का शुक्रिया !!
    धन्यवाद !!

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