रविवार, 18 मार्च 2012

ताऊ की ब्लॉग लिखाई !

ब्लॉग जगत की सबसे बड़ी लाफ्टर मशीन ताऊ नजर नहीं आ रहे बहुत दिनों से . हंसोड़ों को हंसी कि तलब हो रही थी , क्या करे अब ...जा पहुंचे रामप्यारी के पास ...कुछ तो कर ,ताऊ को मना , उनके बिना सब दुखी- उदास है , हंसने के लिए अजीब वाहियात तरीके अपनाकर ब्लॉगजगत की हवा ख़राब कर रहे हैं , अब तू ही कुछ समझा सकती है ...

रामप्यारी ने भी अब चिंता सताने लगी --बहुत दिन हो गये वाकई , ताऊ ने समझाना पड़ेगा , जो इतनी लम्बी छुट्टी पर रहे तो कोई नाम तक याद रखने वाला नहीं मिलेगा !

रामप्यारी गई ताऊ के पास , ताऊ बड़ा- सा पैग बनाये उदास सूरत लिए बैठे थे .

क्या हुआ ताऊ , ऐसी रोनी सूरत क्यूँ बना रखी है , जे आप ही ऐसे रहोगे तो क्या होगा , बाकी तो वैसे ही रोना- धोना मचाये रखते हैं .

के करूँ रामप्यारी , लोगां ना हंसाने के फेर में तेरी ताई ने बहुत कुटाई की लट्ठों से ...कि इब तो दिमाग में कुछ आ ही नहीं रहा , के लिखूं , के ना लिखूं ! तू पढ़ी लिखी तो ना है वरना तेरे को समझाता कि इसे राईटर्स ब्लॉक कहते हैं ....

रामप्यारी को एक बार तो बहुत गुस्सा आया , जे ताऊ बड़ा विद्वान् बना फिरता है , जैसे कि अब तक जो लिखा है , वह रामायण - गीता से भी बढ़ कर है , थोड़े बहुत संगी- साथियों ने तारीफ़ करके चने के झाड पर चढ़ा दिया है , वरना तो लिखता क्या है , घास काटता है ...
मगर फेर थोड़ी सहानुभूति उपजी . ताऊ का इतने दिनों का साथ था आखिर , उनके साथ के कारण ही रामप्यारी की भी इतनी पूछ थी , प्रकट में बोली ...चिंता ना कर ताऊ , मैं पता करती हूँ कि तेरी इस समस्या का हल क्या है ...
ओहो , ये मेरी समस्या हल करेगी , ये मुंह और मसूर की दाल...के जमाना आ गया है , अब चेले गुरु को समझायेंगे ...मन ही मन भड़क रहे थे ताऊ मगर वक़्त की नजाकत देखते प्रकट में प्यार से बोले ...रे रामप्यारी , तू मेरी इतनी चिंता करती है , मने बहुत अच्छा लगा , पन तेरी चिंता मेरे से कुछ लिखवा नहीं सकती ...
कोई नहीं ताऊ , मैं तेरे लिखने का प्रबंध करने की सोचती हूँ ....

इब रामप्यारी जुट गई समस्या सुलझाने में ...अब उसने तो लिखना आता नहीं , कि शिक्षा देगी ताऊ को , पर कुछ करना तो होगा ...
चश्मा लगाये घूम आई बहुत सारे ब्लॉग्स पर ....पढ़ते -पढ़ते उसकी मुस्कराहट चौड़ी होती गई ...
क्या -क्या लिखते हैं लोंग , ये ताऊ फ़ालतू ही परेशान हो रिया है ...लिखना कौन बड़ी बात है !
घूम फिर कर पहुंची ताऊ के पास ...

फालतू ही परेशान हो रहे थे ताऊ , जे लिखना कोई बड़ी बात नहीं है , जे वाणी लिख सकती है तो आपके लिखने में कोई दिक्कत ना है , आप लिखने में आओ तो बड़े -बड़ों की छुट्टी कर सकते हो ...

सच रामप्यारी , ऐसा हो सकता है ! मगर परेशानी तो यही है कि समझ नहीं आ रहा क्या लिखूं ...

कौन मुश्किल है ताऊ ...देख सबसे पहले एक पोस्ट अपने जन्मदिन की लिख , दूसरी ताई से मिला था उस दिन के हुआ था, जे लिख , तीसरी शादी की सालगिरह , चौथी पुरानी प्रेमिका , पांचवी नई प्रेमिका , छठी आभासी प्रेमिका और कुछ ना सूझे तो एक राउंड लगा आ दिल्ली का , तेरे गाँव से दिल्ली कौन दूर है ...तीन -चार पोस्ट बस में बैठने से लेकर दिल्ली पहुचंने तक के के हुआ , सब लिख डाल ...ले ,हो गया दस पोस्ट का जुगाड़ ....

ताऊ का सर भन्नाट हो गया ...ताई से मिला.... उस दिन के हुआ था , सिर पर गूमड़ का निशान उसी दिन का है , जोर का लट्ठ पड़ा था सिर पर ! इब ये लिखूंगा तो मेरी गृहस्थी की के इज्ज़त रह जाएगी ...
तू भी ताऊ , के इज्ज़त की परवाह करण लगा है , लिखना बड़ी बात है ...कुछ तो अपने --- से सिखा होता , जे वे अपनी और देश की इज्ज़त की परवाह करते तो हजारपति से अरबपति ना बन पाते ...तू भी ना ताऊ !
पर के ये ठीक रहेगा , और ये सब प्रेमिकाओं वाली बात , ना ...ये ठीक ना लग रहा ...क्या सोचेंगे वे सब मेरे बारे में , और ताई को उनके बारे में पता लगा तो फेर तो लिखना लिखण छोड़ , पेन पकड़ने लायक भी नहीं रहूँगा ...ताई कोई घर में पाली पालतू बिल्ली थोड़ी है जो मलाई का कटोरा आगे सरकाया और सब भूल -भाल कर खाणे में जुट जाएगी ...तेरी ताई शेरनी है ,कच्चा निगल जायेगी मुझे और डकार भी ना लेगी .. फाड़ खाएगी मेरी बोटी- बोटी , ये प्रेमिकाओं वाली बात रैन दे , और कोई टिप्स दे !

जो भी हो , रामप्यारी ताऊ को और पिटते नहीं देख सकती थी ....

तो ताऊ , आप तो वैसे भी साहित्यकार हो , कई पत्रिकाओं में छपते रहे हो ,रेडियो पर लोंग सुनते रहे हैं आपको , वही सब लिख दो यहाँ ....के परेशानी है , लोंग इम्प्रेस हो जायेंगे कि ताऊ कितना विद्वान् है , और ताई से पिटने का डर भी नहीं रहेगा ...

बावली बूच ...अब तो ताऊ माथा ठोकने लगा ... ...वो सब मैं लिखता हूँ , पैसे मिलते हैं ....इन मुफ्तखोरों (ब्लॉग पाठकों ) के लिए अपने अमूल्य ज्ञान को बाटूंगा यहाँ , बावली हुई है के! वह सब तो विशिष्ठ पाठकों या श्रोताओं के लिए हैं ...के करेंगे ये ब्लॉगर... पढेंगे , कुछ समझेंगे , नहीं समझेंगे , दो लाईन ठोक जायेंगे , कोई तो बहुत बढ़िया कहकर खिसक लेंगे ...कोई थोड़े -बहुत अपनी विद्वता का झंडा गाड़ते नया कन्फ्यूजन पैदा कर जायेंगे ...

मगर ताऊ , जो तुम पत्रिकाओं में लिखते हो , रेडियो पर पढ़ते हो , तो कौण से वहां लोंग खड़े होकर तालियाँ बजाते हैं , तुरन्त प्रतिक्रिया भी नहीं मिलती ...

पिसे मिलते हैं रामप्यारी , पीसे ...तू के समझेगी , कभी कुछ छपवाया होता तो जाणती ....

चित्त भी मेरी , पट्ट भी मेरी ...ताऊ तेरा कुछ नहीं हो सकता !

चल तू रहणे दे ...मैं देखता हूँ के किया जा सकता है ....

जैसे जैसे सुरा ताऊ के हलक से होती जिगर तक पहुँच रही थी , ताऊ के दिमाग की बत्ती जलने लगी थी ...
रे रामप्यारी , जुगाड़ हो गया पोस्ट का ... थोड़े दिन बाद तेरी ताई जाण वाली है मायके , तब कुछ लिख मारूँगा , आएगी लौटके, जब तक मामला ठंडा हो जाएगा ...

अच्छा ताऊ , बड़े होशियार ....ताई के जासूस भरे पड़े हैं तेरी फॅमिली में ...एक फ़ोन घुमाण की देर है !

जे बात है ....कोई ना ...जब तक ताई नहीं है , उनके मुंह बंद करने का इंतज़ाम है मेरे पास ..अपने --- से सिखा हुआ हुनर कब काम आएगा , वही बोलेंगे जो मैं कहूँगा ...

ताऊ के बार की चमाचम बोतलें रामप्यारी को मुंह चिढ़ा रही थी ! रामप्यारी समझ गयी कि ताऊ दुनियादारी के सारे ढब सीख चुका है. लिखने के लिए कुछ न कुछ जुगाड़ कर ही लेगा ! इब चिंता की कोई बात नहीं है ...