शुक्रवार, 30 अक्तूबर 2009

बस ... मुझसे मेरा हाल ना पूछा ...!!


शहर में है दावानल.... पूछा
लपटों का बवाल भी पूछा
वाशिंदों का मिजाज़ भी पूछा
इत्लाफ़ का हिसाब भी पूछा
धुंधलाया था क्या चाँद भी पूछा
धुआं धुआं था आसमां भी पूछा
ज़हर था फिजाओ में पूछा
पशेमां था खतावार पूछा
सब पूछा
बस ...
मुझसे मेरा हाल
ही ना पूछा ...!!


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गुरुवार, 29 अक्तूबर 2009

500 करोड़ की रही देव दिवाली ...देश की सबसे भीषण आग

कल देव उठनी एकादशी थी .... गोधुली वेला में तुलसी विवाह पर तुलसी पूजन कर दीपो और कृत्रिम रौशनी की झिलमिलाहट से प्रफ्फुलित होते हए टेलीविजन ऑन किया तो स्तब्ध रह गए ...सीतापुर में भीषण आग ...देश की अब तक की सबसे भयावह आग.... इंडियन आयल के डिपो में ...जबरदस्त धमाकों ने भूकंप का एहसास करवाया ...अफरा तफरी मच गयी ...जितने भी परिचित और रिश्तेदार थे सबको फ़ोन कर उनके हाल चल पूछे ...पति के बड़े भाईसाहब का मकान उस इलाके के करीब होने के कारण चिंता और भी बढ़ गयी ...फ़ोन लगाया भतीजे को... .घटना की जानकारी देते हुए उसने बताया कालोनी के सभी लोग घरों में ताला लगा कर यहाँ मौजूद मन्दिर के प्रांगन में एकत्रित हो गए थे ...आग की लपेटे उन्हें आसानी से नजर आ रही थी ...किसी भी क्षण उन्हें पलायन करना पड़ सकता था ... उन्हें वहां से सुरक्षित निकल आने की सलाह देते हुए हर घड़ी ईश्वर से सब कुशल होने की प्रार्थना करते रहे ...
बड़े इलाके में बिजली सप्लाई रोक दिए जाने के कारण वे लोग शायद स्थिति की भयावहता का आकलन नही कर पाते हुए थोड़े निश्चिंत से नजर आ रहे थे जबकि टेलीविजन पर लगातार धूं धूं करती आग की लपटे तेजी से बढ़ रही थी ...30 किलोमीटर तक नजर आने वाली आग की इन लपटों को देखने के लिए आम तौर पर सुनसान नजर आने वाली छतों पर शोरगुल मचा हुआ था ...अभी तक आग पर काबू पाने का कोई तरीका नजर नही आ रहा है ... डिपो में मौजूद आयल के अपने आप जल कर नष्ट होने तक कुछ नही किया जा सकता ...
12 घंटे से लगातार आग उगलती ये लपटें जयपुर में 500 करोड़ का खरा नुकसान तो कर चुकी है ...सही आकलन तो इस आग पर काबू पाकर ही किया जा सकेगा ....फिलहाल तो पास में मौजूद दूसरे एल पी जी गोदाम तक आग ना पहुँच सके ...यही एहतियात बरती जा रही है ...खतरा टला नही है ....दिल्ली , मुंबई से एक्सपर्ट की टीम पहुँच चुकी है मगर आग रोक पाने का कोई पुख्ता इंतजाम नही कर पायेई हैं ..30 से भी अधिक दमकलें लगातार लगी हुई हैं ...सोहार्द्र के लिए जाने वाले हमारे शहर के वाशिंदे अपनी तमाम वैचारिक दुश्मनी भूल स्वास्थ्य सेवा और अपने घरों को छोड़ कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचे लोगों की मदद करने में तत्पर हैं ....
ईश्वर हमारे शहर को इस विपदा से जल्दी उबारे ....!!

नोट ....देव उठने एकादशी से पूर्णिमा तक के समय को देव दिवाली ही माना जाता है ...वैसे कार्तिक पूर्णिमा सम्पूर्ण भारत में देव दीपावली के रूप में जानी जाती है ...यह नोट ज्ञानदत्तजी की पोस्ट पढने के बाद लिखा है..!!

सोमवार, 26 अक्तूबर 2009

जा कर दिया आजाद तुझे




जा कर दिया आजाद तुझको दिल की गहराईओं से

ना माने तो पूछ लेना अपनी ही तन्हाईओं से

बादे सबा नही लाएगी अब कोई भी पैगाम बर

ना करना कोई सवाल आती जाती पुरवाईओं से

पीछे छोड़ आए कबकी वो दरो दीवार माजी की

चढ़ने लगे थे रंग जिनपर ज़माने की रूसवाईओं से

नजरे चुराए फिरते थे जिन गलियों और चौबारों में

क्या अच्छा लगता था बचते रहना अपनी ही परछाईओं से

टीसते थे इस कदर जख्म गहरे बेवफ़ाईओ के

भरते नही अब किसी बावफा की लुनाईओं से ....!!


साभार .....शरद काकोस