गुरुवार, 12 अगस्त 2010

"तीज त्यौहारां बावड़ी " ....

मरू भूमि राजस्थान ...बरसों सूखी पड़ी धरा के साथ सामंजस्य स्थापित करते यहाँ के वासियों ने अपनी जीवटता से अपने लोक उत्सवों और रंग बिरंगे परिधानों से गिने चुने रंगों की एकरसता को दूर कर दिया है ...और इस बार जब सावन जम कर बरसा है ...धरा हरी चुनरी पहन कर इठला रही है तो इन पारंपरिक उत्सवों की छटा ही निराली है ...
प्रत्येक त्यौहार और मांगलिक अवसर के अनुसार विभिन्न प्रकार के रंग बिरंगे वस्त्र और भोजन राजस्थानी संस्कृति की अनूठी विशेषता है ...

राजस्थान में तो त्योहारों की शुरुआत ही इस विशेष पर्व से होती है ...
लोकश्रुति में तो कहा भी जाता है ...
"तीज त्यौहारां बावड़ी ले डूबी गणगौर'' ...
यानी तीज सभी त्योहारों को लेकर आती है गणगौर अपने साथ वापस ले जाती है ...जयपुर के सीटी पैलेस की जनानी ड्योढ़ी से निकलने वाली तीज की सवारी विशेष आकर्षण होती है ...


तीज के पहले दिन सिंजारे पर महिलाएं सोलह श्रृंगार कर सजती संवारती हैं , मेहंदी लगाती हैं , झूला झूलती हैं ...नवविवाहिताओं के लिए तो यह पर्व और भी ख़ास होता है ...पहले सावन मास में सास से दूर रहने की परंपरा के चलते अधिकांश नवविवाहिताएँ मायके में होती हैं और उन्हें ससुराल पक्ष की ओर से " लहरिया" और इसके साथ ही लाख की लहरिया डिजाईनदार चूड़ियाँ , घेवर , फल आदि भी भेंट किये जाते हैं ...लहरिया पहने हाथों में मेहंदी सजाये झूला झूलते बरबस ही गुनगुना उठती हैं ...
" पिया आओ तो मनड री बात कर ल्यां "


पर्व सभी महिलाओं के लिए ख़ास है इसलिए कहीं कहीं वे पति से लहरिया दिलाने की मनुहार करती भी नजर आ जाती हैं ...

" म्हान लाई दो नी बादीला ढोल लहरियों सा "




उत्तर भारत में भी यह पर्व " हरितालिका तीज " के रूप में मनाया जाता है ...



चित्र गूगल से साभार

24 टिप्‍पणियां:

  1. Raajsthani aur Gujraat kee aurton ke paridhan me ek baat jo sabse achhee lagtee thee wo yah ki,unke wastr haatkargheke soot se bane hua karte.Us texture ke karan har tarah ki rangsangati janchati.Tispar kee gayee bareek kadhayi.Ab dekhti hun to shahari prabhav me aake synthetic kaa upyog!Baraat me,bade,bade visangat printwali synthetic sadiyan aur any paridhaan dekhe to bada afsos hua!

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  2. राजस्थानी संस्कृति से परिचय कराने का आभार..दोनों यू ट्यूब पसंद आये!!

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  3. स्वादिष्ट राजस्थानी भोजन की याद दिलाकर परदेसियों को मातृभूमि से दूरी का अहसास करा दिया आपने। आसपास बिखरी हरितालिका तीज की खुशियाँ याद हैं मुझे।

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  4. गणगौर को ही म्हारो जलम होयोड़ो है,गांवड़े सै काकी-ताई म्हाने ईस्सर जी ही कह्या करती। हा हा हा
    तीज को त्योहार म्हारे अठै भी बढिया मनायो,सारी छोरी-छापरी भेळी हुयगी थी।
    चोखी पोस्ट-तीज की बधाई

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  5. वाह वाह !
    अब ई बतावल जाए कि लहरिया मिला या नहीं....:):)
    बहुत ही सुन्दर वर्णन किया है राजस्थानी त्यौहार का...वैसे जितने रंग वहाँ वेश भूषा में देखने को मिलते हैं और शायद ही कहीं नज़र आते हैं उतने रंग...घेवर भी स्वादिष्ट लग रहे हैं
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति...
    बहुत पसंद आई है...
    आभार..

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  6. @मिला है ना ...इ लहरिया का फोटो नहीं देखी हैं का ....मेरा ही है ...!

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  7. हमारे यहाँ मतलब पूर्वी यू.पी. में भी तीज का त्यौहार बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. लड़कियाँ मायके में रहती हैं, तो ससुराल से और ससुराल में रहती हैं तो मायके से तीज आता है. और आस-पड़ोस की औरतें उसे देखने के लिए जुटती हैं. खूब होड होती है कि किसके यहाँ से कितना आया और क्या आया :-)

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  8. बढ़िया जानकारी...बहुत सुन्दर वर्णन

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  9. वाह वाह आनन्द आ गया लाजवाब प्रस्तुती। धन्यवाद।

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  10. ji ha Ratalam main to Rajsthani sanskriti ka pura touch dekhane ko milata hai chahe wo khan pan main ho ya pahanawa ya aaosa padharosa wali pyari bhasha ka ho ya tij tyoharon ka :) isliye main bhi inse parichit hun hamare yaha bhi tij bahut mahatva rakhati hai.
    Bahut bhadiya lagi aapki yah post...Dhanywaad.

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  11. ये त्यौहार हमारे यहाँ भी मनाया जाता है और मुझे बहुत पसंद है ..पर वाणी जी कुछ तो दया किया कीजिये ये मेंहंदी,झूला वगेरह तो ठीक है पर ये " घेवर "वगेरह की फोटो लगाने से पहले कुछ तो हम जैसों का ख्याल कर लिया कीजिये :(

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  12. मैं भी शिखा की बात का समर्थन कर रही हूँ जब से चित्र देखा है मुँह में पानी आ रहा है। अभी बाजार जाना पड़ेगा और घेवर लाने पड़ेंगे। लेकिन यहाँ उदयपुर में जयपुर जैसे घेवर नहीं मिलते। अभी फोन करके मंगवाते हैं। राजस्‍थान की तो बात ही निराली है, आज जयपुर में तीज का मेला है। दो दिन पहले उदयपुर में हरियली अमावस का मेला था। खूब धूम रही। गीतों पर तो झूमने का मन कर रहा है। एक बार राजस्‍थानी गीत सुन लो मन बावला सा हो जाता है। पोस्‍ट पढकर आनन्‍द आ गया।

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  13. वाह जी वाह । तीज का आनंद आ गया ।
    दोनों वीडियो बहुत अच्छे लगे ।

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  14. आप को तीज की बहुत बहुत बधाई! आप ने भारतिया मेलो की याद ताज कर दी, धन्यवाद

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  15. हमको भी घेवर का एक टुकडा कल मिल गया था.:) ज्यादा की डाकटर मे मना किया है. फ़ीनी नही मिली. पूरे राजस्थानी ठाठ बाट से मनाया जाता है हमारे यहां भी.

    रामराम.

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  16. वाणीजी
    आनन्द ला दिया तीज के बारे में जानकारी देकर बहुत साल तक चितौड के पास रहने से राजस्थान की तीज देखने का अवसर मिला है और महिला मंडल में भी खूब तीज मनाई है घेवर खाए है पर आपके घेवर की फोटो देखकर फिर से मन ललचा गया \यहाँ बेंगलोर में घेवर कहाँ ?
    बन्ना रे बागां में झुल्या डाल्या
    म्हारी बनी ने झुला दीजो म्हारा छैल भवर सा ......
    शायद ऐसा ही बहुत कुछ गया जाता है झुला झूलते |

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  17. हरियाणा, राजस्थान में तो तीज-त्योहार की छटा देखने लायक होती है.....

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  18. राजस्थान का लोकसंगीत क्या कहने
    सुन्दर आलेख .. सुन्दर गीत

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  19. तीज का त्यौहार तो इधर भी बड़े जोरशोर से मनाया जाता है -बड़ा पर्व है इसलिए तीज- त्यौहार का जुड़वाँ शब्द विधान भी व्यव्हार में आया हो शायद !

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  20. वाह जी वाह
    तीज का आनंद आ गया
    राजस्थानी संस्कृति से
    परिचय कराने का आभार ....

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