रविवार, 3 जून 2012

हिंदी इतनी सरल भी नहीं.... ( हिंदी को पढ़ते हुए )

हमारी हिंदी की क्या बात है . हिंदी से मेरा मतलब है हिंदी भाषा , वह हिंदी नहीं जो आमतौर पर ईर्ष्यावश लोंग एक  दूसरे की कर दिया करते हैं . 
हिंदी यानि हमारी राष्ट्रीय भाषा . सिर्फ कागजों में दर्ज हो भले ही ,क्योंकि अक्सर सरकारी कामकाज अंग्रेजी में होते ही देखे हैं . कुछ प्रदेशों में तो ग्रामीण इलाकों में हिंदी बोलने समझने वाले ढूंढें नहीं मिलेंगे . वही कुछ पढ़े -लिखे बुद्धिजीवी हिंदी बोलने वालों की हिंदी करने में कहीं पीछे नहीं रहते , ख़ुशी यही है कि हम हिंदी भाषी प्रदेश में हैं तो कम से कम अपनी अभिव्यक्ति के लिए तो दूसरी भाषा का मोहताज़ नहीं होना पड़ता .  

हिंदी का अपना वृहद् शब्दकोष है जिसने उर्दू , फारसी , संस्कृत , अंग्रेजी के अनगिनत शब्दों को आत्मसात किया है . हिंदी में शब्द किसी भी वस्तु , व्यक्ति या रिश्ते का सम्पूर्ण परिचय दे देते हैं . अंग्रेजी की तरह नहीं कि तू भी यू , तुम भी यू , आप भी यू ही , किसी पुरुष या स्त्री से यह कह कर मिलवाओ कि मीट माय  आंटी  या मीट माय अंकल ...तो सामने वाला सिर खुजाता ही रह जाए ...अबे किसी अंकल की बात कर रहा है , तेरे पिता या माता का भाई और वो भी कौन सा छोटा या बड़ा , या फिर कहीं पड़ोस वाले अंकल की बात तो नहीं कर रहा . ऐसे ही ये आंटी कौन है , तेरी माँ की बहन या पिता की , या पडोसी अंकल की ....अंग्रेजी में इनके लिए अलग संबोधन नहीं है शायद उन्हें रूचि ही नहीं होती यह सब जानने में ,मगर हम भारतीय तो सब कुछ जान लेना चाह्ते हैं , खोद -खोद कर पूछते हैं , शायद इसलिए ही शब्दकोष ने हमें यह सुविधा दी है कि ज्यादा मगजमारी ना हो . 

साहित्य के लिए प्रयुक्त शुद्ध हिंदी और बोलने के लिये आम हिंदी में क्लिष्टता और सहजता का अंतर है . हिंदी के विद्वानों और आम इंसानों को उनके बोलने और लिखने के अंतर से जाना जा सकता है . हमारे जैसा आम भारतीय हिंदी बोलता तो है , मगर हर किसी का (हमारा भी )हिंदी भाषा पर सम्पूर्ण अधिपत्य नहीं है और इसलिए कई बार शब्दों की हेराफेरी में  अर्थ के अनर्थ हो जाते हैं . ऐसे ही कुछ शब्दों की पड़ताल है यहाँ जो दिखने/लिखने  में एक जैसे ही लगते हैं , मगर अर्थ में भिन्न है .

1. प्रणय -परिणय 
प्रेम अथवा प्रीति का नाम प्रणय है जबकि परिणय विवाह को कहते हैं !
उनके प्रणय की परिणिति परिणय में हुई .

2. संपन्न -समापन 
संपन्न शब्द का प्रयोग समाप्ति का द्योतक है .
समापन अर्थात समाप्ति से पूर्व का अंतिम समारोह . 
समापन समारोह संपन्न हुआ . 

3. श्रम -परिश्रम 
श्रम का तात्पर्य शारीरिक श्रम से होता है जैसे श्रमिक का श्रम .
परिश्रम जिसमे शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार का  श्रम शामिल हो , जैसे राम परीक्षा में परिश्रम से उत्तीर्ण हुआ .

4. शंका -आशंका 
शंका अर्थात जिज्ञासा , जानने की उत्सुकता , आपत्ति 
आशंका का प्रयोग संदेह के अर्थ में किया जाता है . " देशों के मध्य बढ़ते तनाव के मद्देनजर गृहयुद्ध की आशंका है ".

5. वेश्या -वैश्या 
वेश्या कुलटा स्त्री है , जो अपने शरीर का व्यापार करती है ...जबकि वैश्या वैश्य स्त्री है ,वह आचार्या भी हो सकती है .

6. भागवत - भगवद् गीता 
भागवत   अठारह पुराणों में से एक पुराण है जबकि भगवद् गीता महाभारत का वह  अंश है जिसमे श्रीकृष्ण ने अर्जुन को निष्काम कर्मयोग का उपदेश दिया था . 

7. नृत्य -नृत 
नृत्य एक कला है , जिसमे भावप्रधानता होती है जबकि नृत नृत्य का बाह्य अनुकरण है . नृत्य नृत और नाट्य का मिश्रण है जबकि नृत  में तालों का प्रयोग होता है.  

8. विस्तर   -विस्तार 
विस्तार का अर्थ फैलाव है जबकि  विस्तर अर्थात विस्तार प्राप्त किया हुआ . 

9. प्रेमिका -प्रिया 
प्रेमिका प्रेम करती है जबकि प्रिया वह है जिससे प्यार किया जाए . 

10. ब्रह्म -ब्रह्मा 
ब्रह्म एक विचार है , व्यक्ति नहीं जबकि ब्रह्मा हिन्दुओं के एक देव हैं . 

ऐसे अनगिनत और भी  शब्द हैं जिनकी पड़ताल उनके भावार्थ के रूप में की जा सकती है .हिंदी की अधूरी रह गयी शिक्षा के कारण हिंदी को पढ़ते हुए इन शब्दों के हेरफेर ने खूब चौंकाया . जब इन्टरनेट पर खंगाला तो पाया कि कई शब्दकोशों में भी इनके अंतर / अर्थ को स्पष्ट विभाजित  नहीं किया गया है . शायद  भाषा को  दुरुहता से बचाना और आमजन में लोकप्रिय बनाना इसका एक प्रमुख कारण रहा हो . ब्लॉग जगत के  हिंदी विद्वान /विदुषी इस पर प्रकाश डालें तो मुझ सहित आम हिंदी भाषी का भला हो जाए !

41 टिप्‍पणियां:

  1. हिंदी की शुद्धता की व्याख्या ज़रूरी है ... और राष्ट्र को जोड़ने की भाषा यही है

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  2. कुछ नए शब्दों को आपके माध्यम से जाना|

    ...कम से कम अंग्रेज़ी में शिष्टाचार की समस्या नहीं है,जबकि हिंदी में अलग-अलग तरह से बोलने वाले अपने लहजे में बोलते हैं और दूसरा उस लहजे को आत्मसात नहीं कर पाता..!इस मामले में हरियाणवी लहजा सबसे कर्कश है !

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  3. (१)
    आपको स्मरण होगा , एक बार मैंने आपको 'नकारात्मक / ठुकराने' के स्थान पर 'नकार' शब्द का प्रयोग करके चौंकाया था ! व्यक्तिगत रूप से मुझे कई बार नवशब्द का प्रयोग अच्छा लगता है , भले ही वह भाषाई शास्त्रीयता का उल्लंघन ही क्यों ना करता हो !

    (२)
    यह कहना कठिन है कि मैंने कभी , आपकी पोस्ट में उद्धृत चिंता जैसे कोई हरकत कभी की है कि नहीं ! हो सकता है कि ऐसा अनजाने में या भाषा का विद्यार्थी नहीं होने के कारण हो गया हो , ठीक से स्मरण नहीं ! मुझे लगता है कि शब्द की स्पेलिंग से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है कि शब्द अपना वास्तविक अर्थ संचारित कर पा रहा हो , आखिर को भाषा का मकसद भी यही है !

    (३)
    एक सार्थक पोस्ट लेखन के लिए ह्रदय से आभार , जोकि लेखन की अशुद्धियों और लापरवाही के प्रति सचेत करती है !

    (४)
    याद आ रहा है श्री गिरीश बिल्लौरे मुकुल का ब्लाग नाम 'इश्क प्रीत लव' जोकि उन्होंने जानबूझकर ही रखा होगा !

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    1. माना कि आम हिन्दीभाषी होने के तहत शब्दों की स्पेलिंग से ज्यादा उसके अर्थ का महत्व अधिक है .बोलते हुए शब्दों का स्वरुप बदल जाने की व्यवस्था हमारी हिंदी भाषा में तत्सम और तद्भव के रूप में हैं ही . मगर शब्दों के सही अर्थ की जानकारी होनी ही चाहिए , हिंदी विषय की भूतपूर्व छात्रा होने के कारण यह आग्रह मेरा स्वयं से भी है . शब्दों के भावार्थ के अतिरिक्त भी इन्टरनेट पर टायपिंग की गड़बड़ी ( मुझसे भी बहुत होती है ) से कई शब्दों की मात्राएँ ही बदल गयी हैं , जैसे वेश्या शब्द सर्च करने पर लगभग हर स्थान पर वैश्या ही मिला . ऐसे ही कई अशुद्ध शब्द इन्टरनेट पर धीरे- धीरे स्वीकृत हो जायेंगे , इसकी चिंता हम हिंदी भाषियों को करनी होगी !!

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  4. अशुद्ध शब्दों के प्रयोग से प्रायः अशुद्ध शब्द रूढ होकर स्थायी हो जाते है। जो भाषा को अन्तः संकुचित भी करते है।
    समान अर्थवत्ता के शब्दों के कईं पर्याय होते है, सटीक अभिव्यक्ति के लिए उपयुक्त पर्याय का शब्द प्रयोग अनावश्यक विस्तार को चमत्कारिक ढ़ंग से नियंत्रित कर देता है।
    आपका यह आलेख सार्थक सजगता को प्रेरित करता है। आभार

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  5. रोचक ,मैं भी कई बारीक अंतर को इस पोस्ट से समझ पाया -आभार !
    वैश्या को ही मैं वेश्या का शुद्ध रूप समझता था ..

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  6. बहुत ही सुन्दर ..ज्ञानवर्द्धक पोस्ट

    पर एक बात बताओ ये शब्दों के अर्थ तुमने शब्दकोष से लिए हैं ... या स्वयं लिखे हैं ??
    अगर शब्दकोष में भी है (जिसे किसी हिन्दीप्रेमी ने ही अपडेट किया होगा ) तब भी..वेश्या के लिए.."कुलटा स्त्री ' का संबोधन सही नहीं है जबकि अब हम सब जानते हैं कि किन मजबूरियों के तहत और कई बार धोखे से वे देह व्यापार में धकेली जाती हैं.

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    1. रश्मि ,
      हमारे - तुम्हारे सोचने समझने से शब्दों के अर्थ नहीं बदल जाते हैं वो मैंने लिखे हो या शब्दकोष से लिए हो . जैसे लूटपाट करने वाला प्रथम दृष्टया चोर या डाकू ही कहलायेगा ,भीख मांगने वाला भिखारी ही कहलायेगा . वह किसी मजबूरी में ही कर रहा हो यह सब , तब भी !!यह तो बाद में साबित होगा कि किस मजबूरी में कोई कार्य किया गया ! जैसे कि जो सैनिक हमारे लिए शहीद हैं, दूसरों के लिए शत्रु /आक्रमणकर्ता ही होंगे !

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    2. वाणी,

      मैने 'देह व्यापार' शब्द पर आपत्ति नहीं की...वो अपनी मर्जी से करे...'देह व्यापार'...या किसी मजबूरी से वह 'देह व्यापार' ही कहलायेगा..वही जैसे लूटपाट करनेवाले....को डाकू..या भीख मांगने वाले को भिखारी कहा जाता है. उनके कर्म ही उनका परिचय दे रहे हैं ...वैसे ही देह व्यापार करने वाले को वेश्या..कह जाएगा.

      पर वेश्या का अर्थ कुलटा स्त्री होता है??

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    3. हाँ , मेरे पास जो शब्दकोष है (हरदेव बाहरी ) उसमे वेश्या और वैश्या के अर्थ को पृथक करते हुए इसका अर्थ कुलटा ही है !

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    4. मैने तो पहले ही कहा...कि शब्दकोष से भी हो तब भी मुझे सही नहीं लगा....शब्दकोष में लिखा..अंतिम सत्य नहीं होता...उसमें भी संशोधन होते रहते हैं...और हो सकता है..दूसरे शब्दकोष में 'वेश्या' के लिए 'कुलटा' शब्द प्रयुक्त नहीं किया गया हो.

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    5. सिर्फ शब्दकोष से ही नहीं ,मेरे ख्याल से भी कुलटा शब्द गलत नहीं है वेश्या के लिए ! स्वेच्छा से या मज़बूरी से व्यभिचार करने वाली स्त्री कुलटा ही कहलाती है .

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    6. वाणी,
      ये कुलटा शब्द मुझे इसलिए खटका था क्यूंकि अखबारों में..पत्रिकओं में..टी.वी. पर देखे कई मासूम चेहरे नज़रों के सामने घूम गए थे...जिन्हें दूर-दराज के कस्बों, गाँवों से नौकरी का लालच देकर...कभी शादी का झांसा देकर शहर में लाकर बेच दिया गया था. और उस नरक में भी उनपर कड़ी नज़र रखी गयी..वे निकल नहीं सकती थीं..और उनकी इच्छा के विरुद्ध उन्हें देह व्यापार अपनाने के लिए मजबूर किया गया .

      उनमे से कुछ भाग्यशाली निकली..किसी सहृदय कस्टमर ने अपना फोन देकर उनके परिवार वालों से बात करवाई...कुछ पुलिस की रेड में बचाई गयीं...कुछ के माता-पिता ने उन्हें ढूंढ निकाला. और हमें उनकी कहानी पता चली. ज्यादातर लडकियाँ इतनी भाग्यशाली नहीं होतीं.

      तो ऐसी स्थिति में जब उनकी कोई गलती नहीं है तो उन्हें कुलटा कैसे कहा जाए??

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    7. ऐसी घटनाएँ बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है . हमारी सामाजिक व्यास्था का एक बहुत ही घृणित पहलू है, निश्चित ही ये लड़कियां घृणा नहीं बल्कि सहानुभूति के योग्य है. चूँकि वे इस दलदल से निकल चुकी है , इसलिए इस शब्द से भी मुक्त हैं .
      जहाँ तक मेरी पोस्ट का सवाल है यहाँ दो एक जैसे शब्दों के अर्थ में विभिन्नता दर्शाने के लिए यह शब्द अपनाया गया है , इसलिए यहाँ यह उचित लग रहा है .

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    8. माफिया के शिकंजे में मजबूरी से फंसे रहने वाले भी सहानुभूति अर्जित करने के बाद भी अपराधी ही तो कहलायेंगे ना !

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    9. @यहाँ दो एक जैसे शब्दों के अर्थ में विभिन्नता दर्शाने के लिए यह शब्द अपनाया गया है

      शब्दकोश में यह ना कहकर
      5. वेश्या -वैश्या
      वेश्या कुलटा स्त्री है , जो अपने शरीर का व्यापार करती है ...जबकि वैश्या वैश्य स्त्री है ,वह आचार्या भी हो सकती है .


      सिर्फ यह कहा गया होता...

      वेश्या ऐसी स्त्री है , जो अपने शरीर का व्यापार करती है ...जबकि वैश्या वैश्य स्त्री है ,वह आचार्या भी हो सकती है .

      तब भी शब्दों के अर्थ में विभिन्नता नज़र आ जाती.

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    10. @माफिया के शिकंजे में मजबूरी से फंसे रहने वाले भी सहानुभूति अर्जित करने के बाद भी अपराधी ही तो कहलायेंगे ना !

      इन्हें भी तो वेश्या कहा ही जा रहा है.

      पर 'कुलटा'..शब्द एक स्वभाव को दर्शाता है...

      कुलटा का अर्थ अगर शब्दकोश में ढूंढो तो उसका अर्थ 'वेश्या' नहीं मिलेगा..बल्कि 'कंकालिनी '..' उग्र स्वभाव की' 'कर्कशा'... 'झगड़ालू'... 'लड़ाकी.'. ही मिलेगा..

      कुलटा शब्द का उपयोग प्रेमचंद ने अपनी कहानी स्वर्ग की देवी. में इस प्रकार किया है.
      - " कोई कुलटा घर में आ जाएगी और इनका सर्वनाश कर देगी।"

      कुलटा शब्द का उपयोग प्रेमचंद ने अपनी कहानी दो सखियाँ. में इस प्रकार किया है.
      - " वह कुलटा भी खीसें निकालने लगी।"

      कुलटा शब्द का उपयोग प्रेमचंद ने अपनी कहानी दो सखियाँ. में इस प्रकार किया है.
      - " ऐसे उदासियों को तो कुलटा चाहिए, जो उन्हें तिगनी का नाच नचाये।"

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  7. भाषा का सिमित ज्ञान रहता है आम व्यक्ति को .. ऐसे में सचेत और जानकार नागरिक का ये फर्ज बन जाता है की अपने माध्यम से वो भाषा का सही उपयोग कर के सभी के बीच उधारण रखे ... ऐसे में लेखक का भार कुछ बढ़ जाता है जो जरीर भी है ...
    एक सार्थक लेख के लिए बधाई और शुभकामनायें ... बहुत कुछ नया जानने कों मिला आज ...

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  8. बहुत ही अच्‍छी ज्ञानवर्धक प्रस्‍तुति।

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  9. प्वाईंट 5 और 8 नए हैं हमारे लिए, वैश्या और विस्तर हमारी तरफ प्रचलन में नहीं है|
    कार्यान्वयन और क्रियान्वयन भी ऐसे ही दो शब्द हैं, शब्दकोष खंगाला नहीं लेकिन दोनों में अंतर जिससे भी पूछा, अनुत्तरित ही रहा|

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    1. विस्तर शब्द मैंने भी पहले नहीं सुना।

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  10. वैश्य हिंदी का नहीं, संस्कृत का शब्द है, अर्थात खेती-बाड़ी करने वाले लोग, उन चार वर्णों में एक जिनमें समाज को बांटा गया था ( ब्राह्मण, क्षत्रिय ,वैश्य (बनिया व कॄषक वर्ग) व शूद्र (शिल्पी
    ,श्रमिक समाज)), संस्कृत में वैश्य का स्त्रीलिंग है वैश्या और बहुवचन है वैश्याः..

    श्रुतिसमभिन्नार्थक शब्दों की अच्छी जानकारी दी है..आपने, इसमें बहुत सारे शब्द और भी आ सकते हैं...एक-दो यहाँ हैं..

    शची = इन्द्राणी
    शुची=पवित्र
    सम= समान
    शम=संयम
    पट=कपड़ा
    पट्ट=तख्ता

    @संजय जी शायद 'कार्यान्वयन; का अर्थ Execution या निष्पादन होता है और क्रियान्वयन का अर्थ Implementation होता है..
    एक सार्थक लेख के लिए बधाई..!

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    1. धन्यवाद अदा जी,
      एक बार एक विद्वान महोदय से यही शंका कार्यक्रम और क्रियाकर्म के अर्थ में जाहिर की थी तो बहुत फटकार मिली थी, इसीलिये आज भी पूछा नहीं था| आज समाधान मिला, लेकिन अब नई शंका execution\impelemntation की उठ खड़ी हुई है| खैर वो भी सुलझेगी कभी न कभी| धन्यवाद स्वीकार करें|

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    2. कई नए शब्दों का परिचय देने के लिए आभार !

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    5. संजय जी,

      मैं कोशिश करती हूँ आपकी यह शंका भी दूर करने की..

      कार्यान्वयन या Implementation का अर्थ है किसी प्रक्रिया यानी process को एक रूप देना, जैसे आपके बैंक में एक फिक्स्ड डिपोजिट खोलने की प्रक्रिया होगी, पहले फॉर्म भरना होगा, फिर धारक के हस्ताक्षर लेने होंगे, फिर पैसे जमा करने होंगे, मेनेजर के sign होंगे इत्यादि, जिसे आप 'to do list' कह सकते हैं, उस प्रक्रिया को पूरा करके ही फिक्स्ड डिपोजिट का काम हो सकता है, इस प्रोसेस या प्रक्रिया को establish या स्थापित करना कार्यान्वयन या Implementation कहलायेगा...और उसी प्रक्रिया का पालन करते हुए, फिक्स्ड डिपोसिट खोलना या खोलने का काम पूरा करना, Execution या क्रियान्वयन कहलायेगा....

      आमतौर पर आप एक बार Implementation करते हैं और बार-बार Execution करते हैं....

      आपको कार्यक्रम और क्रियाकर्म के लिए सही फटकार मिली है :)

      आशा है बात कुछ समझ में आई होगी आपको

      धन्यवाद..

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  11. मुझे तो कवयित्री शब्द ही नहीं मिला शब्द कोश में। शायद पुरुष प्रधान समाज की मानसिकता कि कविता को स्त्री लिख ही नहीं सकती।
    ब्रह्म वाक्य (विचार) की तरह ब्रह्म मुहूर्त भी है।

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  12. वाणी जी
    नमस्ते
    कुलटा शब्द को लेकर कुछ जानकारी
    http://en.wiktionary.org/wiki/kulta kulta means gold
    http://www.definition-of.net/advanced-word-searches.aspx?q=%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%9F%E0%A4%BE&match=starts&lang=hi कुलटा २ कंजकसंज्ञा पुं० [सं०] १. पक्षी विशेष । २. मैना [को०]।


    कुलटा आम भाषा में जो अपने कुल से उल्ट हो

    आंटी "जी" इंग्लिश में होता ही नहीं हैं !!!!!!

    प्रणय का अर्थ प्रीतियुक्त प्रार्थना http://www.definition-of.net/advanced-word-searches.aspx?q=%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A3%E0%A4%AF&match=starts&lang=hi

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  13. अबे किसी अंकल की बात कर रहा है , तेरे पिता या माता का भाई और वो भी कौन सा छोटा या बड़ा , या फिर कहीं पड़ोस वाले अंकल की बात तो नहीं कर रहा . ऐसे ही ये आंटी कौन है , तेरी माँ की बहन या पिता की , या पडोसी अंकल की ....

    yae padh kar aesaa lagaa jaesae mohallae kaa koi lafangaa baat kar rahaa haen

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    1. रचना जी ,
      टिप्पणी नहीं करने का इरादा बदल देने का शुक्रिया :)....अब बेचारे लफंगे भी इसी समाज के हिस्से हैं , जब हम वेश्या या कुलटा की मजबूरी समझ सकते हैं तो इनको उपेक्षित क्यों रखा जाए . वैसे अपनेपन में यह भाषा लोंग इस्तेमाल करते हैं .अब अपनापन इतनी लफंगई तो स्वीकार कर लेता है कुछ प्रदेशों में . आखिर आपको चर्चा इतनी रोचक लगी की टिप्पणी किये बिना खुद को रोक नहीं सकीं ...आभार !

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  14. एक सार्थक पोस्ट..... हिंदी की पहचान बनी रहे इसके लिए इन शाब्दिक अशुद्धियों की ओर ध्यान देना ज़रूरी है

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  15. सभी सुधीजनों का बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेने के लिए आभार .अब तो हिंदी का भला होकर ही रहेगा कम से कम इन्टरनेट पर तो !!

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  16. ओह हो .बढ़िया पोस्ट है.जरा सी मात्रा से अर्थ का अनर्थ हो जाता है. कुछ संशय मेरे भी घटे.

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  17. wow !! यह पोस्ट मैंने अभी ही देखी - very informative :)

    एक ठो addition हम भी कर दें ? :)

    स्तोत्र = hymn, prayer song
    स्रोत = source

    --------
    बाकी - "वेश्या" के सम्बन्ध में हम रश्मि जी से इत्तेफाक रखते हैं जी |

    मेरे शब्दकोष में
    - वेश्या = "देह व्यापार करने वाली स्त्री"
    - कुलटा = "चरित्र हीन स्त्री"

    दोनों के दो अलग अर्थ हैं | देह व्यापार करना और चरित्र हीन होना एक ही नहीं है मेरी नज़र में - क्योंकि हमारी देह हमारा चरित्र नहीं होती, देह सिर्फ आवरण होती है |

    महाभारत में "वेश्या" शब्द को जिस तरह गाली की तरह इस्तेमाल किया गया द्रौपदी के लिए -उससे यही लगता है की वेश्या एक गाली ही थी तब - कुलटा और वेश्या का शब्दार्थ भले ही अलग रहा हो - भावार्थ एक ही था | किन्तु यह मुझे सही नहीं लगता | वेश्या होना उस व्यक्ति विशेष का अपमान नहीं होना चाहिए जो स्वयं वेश्या है, बल्कि यह तो उस समाज के लिए गाली है जो उसे कुलटा मानता है, वेश्या बनाता है, और फिर उस पर चरित्रहीन होने का लेबल लगाता है |

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