रविवार, 19 जुलाई 2009

आभार प्रेम का मनाती कैसे .....

जब चेतना किसी परिस्थिति विशेष के केन्द्र में स्वयं को रखकर देखती है तो दुसरे का दारुण दुःख भी स्वयं का ही हो जाता है ...ह्रदय की अनंत गहराइयों से निकले उदगार जब बोलों की शक्ल ले लेते हैं...कविता बन जाती है ...दरअसल कविता लिखी नही , लिखवाई जाती है ...भावनाओं की कलम से ...ह्रदय के द्वारा....
आभार प्रेम का मनाती कैसे .....

आलेख प्रेम का लिखा गया हो जब बारूद की कलम से
किस्मत के हाथों उसे बंचवाती कैसे !
तुम ही कहो ...आभार प्रेम का मनाती कैसे !!

कंटीली पथरीली राहों पर तो
लहूलुहान कदमों से भी चल पड़ती साथ
लाशों की नींव ...बेजुबान आहों की कंक्रीट ..
भय से निर्मित डगर पर कदम बढाती कैसे !
तुम ही कहो ...आभार प्रेम का मनाती कैसे !!

मेहनतकश हाथो के छालो से रिश्ते लहू भरी
गुलाबी हथेलिओं को थाम भी लेती.. मगर
बेगुनाह मासूमों के रक्त से सने हाथों में
मेहंदी भरे यह हाथ थमाती कैसे !!
तुम ही कहो ...आभार प्रेम का मनाती कैसे !!

जब किसी मासूम को कर दिया अनाथ तुमने...
की कभी तुमसे भी छिना था बचपन किसीने
यह कह देने भर से तो गुनाह तुम्हारा कम ना होगा
खुदा के घर जवाब तुम्हे भी तो देना ही होगा

जो भर लाई थी प्रेमाश्रु ...
ह्रदय की अथाह गहराइयों से खींच कर ...
बेगुनाह आहों से श्रापित ह्रदय पर अर्ध्य चढाती कैसे !
तुम ही कहो ...आभार प्रेम का मनाती कैसे !!

.....................................................................

11 टिप्‍पणियां:

  1. सचमुच हृदय ने भावनाओं की कलम से लिखवाई है ये कविता.

    आभार

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  2. आभार प्बरेम का मनाती कैसे?हुत ही मार्मिकता से उकेरे गये सवाल हैं. बहुत शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  3. बहुत उम्दा भावपूर्ण रचना.

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  4. बहुत उम्दा भावपूर्ण रचना!!

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  5. क्या लिखूं.... मार्मिक कविता है....
    www.nayikalam.blogspot.com

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  6. सुन्दर!
    आपको पोस्ट के टाइटल फील्ड का प्रयोग करना चाहिये शीर्षक के लिये, अन्यथा फीड बिना टाइटल की दीखती है।

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  7. बहुत सुन्दर कविता के लिए बधाई, मैं इस प्रेम भावना को प्रणाम करता हूँ. शुभकामनाएं.

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  8. यह कह देने भर से तुम्हारा गुनाह कम न होगा..... बहुत ही जीवंत प्रश्न है बधाई .

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  9. बहुत ही कोमल,गहरे भावों को शब्दों में पिरोया है......मेरी इच्छा है कि आप अपनी यह रचना सक्षिप्त परिचय के साथ mp3 फॉर्मेट में अपनी आवाज़ रिकॉर्ड करके भेजें rasprabha@gmail.com पर हिन्दयुग्म कवी सम्मलेन के लिए......अंतिम तिथि २० अगस्त . आवाज़ तेज़ होनी चाहिए

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  10. बहुत सुन्दर कविता के लिए बधाई.

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