रविवार, 15 नवंबर 2009

कौन तुम मेरे ह्रदय में ....महादेवी

मेरी पसंदीदा कविताये .....


कौन तुम मेरे हृदय में ?

कौन मेरी कसक में नित
मधुरता भरता अलक्षित ?
कौन प्यासे लोचनों में
घुमड़ घिर झरता अपरिचित ?

स्वर्ण-स्वप्नों का चितेरा
नींद के सूने निलय में !
कौन तुम मेरे हृदय में ?

अनुसरण निश्वास मेरे
कर रहे किसका निरन्तर ?
चूमने पदचिन्ह किसके
लौटते यह श्वास फिर फिर

कौन बन्दी कर मुझे अब
बँध गया अपनी विजय में ?
कौन तुम मेरे हृदय में ?

एक करूण अभाव में चिर-
तृप्ति का संसार संचित
एक लघु क्षण दे रहा
निर्वाण के वरदान शत शत,

पा लिया मैंने किसे इस
वेदना के मधुर क्रय में ?
कौन तुम मेरे हृदय में ?

गूँजता उर में न जाने
दूर के संगीत सा क्या ?
आज खो निज को मुझे
खोया मिला, विपरीत सा क्या

क्या नहा आई विरह-निशि
मिलन-मधु-दिन के उदय में ?
कौन तुम मेरे हृदय में ?

तिमिर-पारावार में
आलोक-प्रतिमा है अकम्पित
आज ज्वाला से बरसता
क्यों मधुर घनसार सुरभित ?

सुन रहीं हूँ एक ही
झंकार जीवन में, प्रलय में ?
कौन तुम मेरे हृदय में ?

मूक सुख दुख कर रहे
मेरा नया श्रृंगार सा क्या ?
झूम गर्वित स्वर्ग देता -
नत धरा को प्यार सा क्या ?

आज पुलकित सृष्टि क्या
करने चली अभिसार लय में
कौन तुम मेरे हृदय में ?

रचनाकार .......महादेवी वर्मा

22 टिप्‍पणियां:

  1. आज पुलकित सृष्टि क्या

    करने चली अभिसार लय में

    कौन तुम मेरे हृदय में?

    बहुत सुन्दर भाव

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  2. आभार महादेवी जी की यह रचना प्रस्तुत करने का!!

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  3. bahut hi achhi lagi rachana,humne pehli baar padhi,dhanyawad

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  4. महादेवी जी की कविता का रसास्वादन करके तृप्त हो गया

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  5. महादेवी की इस रचना-प्रस्तुति का आभार ।

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  6. Sun raha hun ek hi
    jhankaar jeevan mein , pralay mein ....

    Mahadevi ji ki istni sundar kaljayee rachna ke likye bahoot bahoot aabhaar ....

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  7. ak to poori dhhoop dene ka dhnywad aur doosre mahadeviji ki advitiy kavita pdhvane ka kotish dhnywad.

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  8. महादेवी वर्मा जी की कविता पढ़वाने का धन्यवाद , मन के भावों को अभिव्यक्ति देने में उनका कोई सानी नहीं | पिछले दिनों उनकी याद में रामगढ़ में एक साहित्यिक गोष्ठी रखी गई थी , ये वही जगह थी , जहाँ बैठ कर उन्हों ने बहुत कुछ लिखा ; सौभाग्य से मैं भी उस भवन के व प्रकृति की अद्भुत छटा के दर्शन कर पाई |

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  9. school ke dino me mahadeviji ki kavita aur ek do kahaniya padhi thim,saalo bad aaj unki rachna ko padhne ka avsar pradan karne ke liye abhar.

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  10. महादेवी जी की रचनाएँ अपनी एक अमिट छाप छोडती हैं.........कभी आपकी पसंद में मैं भी आऊं तो कोई बात बने ....

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  11. महीयशी महादेवी वर्मा की कविता पढ़वाने के लिए आभार!

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  12. ताजा हवा के एक झोंके समान

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  13. एक सुन्दर कविता पढ़वाने कि लिये धन्यवाद !

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  14. महीयसी की इस अमर रचना से साक्षात्कार कराने का शुक्रिया।
    -Zakir Ali ‘Rajnish’
    { Secretary-TSALIIM & SBAI }

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  15. कौन मेरी कसक में नित
    मधुरता भरता अलक्षित ?
    कौन प्यासे लोचनों में
    घुमड़ घिर झरता अपरिचित ?

    स्वर्ण-स्वप्नों का चितेरा
    नींद के सूने निलय में !
    कौन तुम मेरे हृदय में ?

    महादेवी तो वेदना की प्रतिमूर्ति रही हैं ...इसमें भी उनकी वही वेदना झलकती है ...आभार इस महान हस्ती से फिर रूबरू कराने के लिए .....!!

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  16. mahadevi verma ji ki itni anupam kriti padhwane ke liye shukriya.

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  17. बहुत बहुत बहुत बधाई इस सुंदर प्रस्तुती पर

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  18. बहुत पहले गीतांजली का हिन्‍दी अनुवाद पढा था । याद आ गई ।

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  19. वाह क्या खूब कविता पढ़वाई आज आपने वाणी जी !!
    आदरणीया महादेवी
    को शत शत नमन

    स्नेह ,
    -- लावण्या

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  20. महान कवित्री महादेवी वर्मा की कविता पढवाने के लिए ...हम आपके ह्रदय से आभारी हैं...
    इतने वर्षों बात इसे पढना बहुत सुखद रहा...
    धन्यवाद...

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  21. महादेवी मेरी भी प्रिय कवियों में से हैं -उनका प्रेम का गहन विरही भाव मन को मथ डालता है ! यह कविता भी ऐसी है !

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