सोमवार, 30 अप्रैल 2018

चटनी जितनी लीद.....

कुछ समय पूर्व वृंदावन से पधारे कथा वाचक से राम कथा को सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ . गृह कार्यों से फारिग होकर लगातार सुन पाना संभव भी नहीं इसलिए बीच के कुछ समय का लाभ लेकर ही उत्साहित अथवा कृतज्ञ समझ लिया जाए।पूर्ण समय न दे पाने का सिर्फ यही कारण है ,ऐसा भी नहीं कहा जा सकता।

रामचरितमानस का पाठन कई बार किया है और इनसे सम्बंधित कथा कहानियों का वाचन श्रवण एवं मंचन लाभ भी लिया है  सो मन में यह भावना भी रहती है कि  आखिर इस बार नया क्या सुनने को मिलेगा। सब तो पता है। कथा की श्रोता होते हुए भी यह विचार मन में चल रहा था मंच से स्वामी जी ने शिव शंकर पार्वती का वह प्रसंग सुना दिया जिसमें शिवजी काकभुसुंडि से राम कथा का श्रवण कर रहे मगर पार्वती सोच रही कि मुझे तो सब पता है यह क्या सुनाने वाले हैं। सीता का वेश धर  राम की परिक्षा लेने वाले इस वृतांत  में अंततः सती  को भान होता है कि सब ज्ञात होकर भी बहुत कुछ अज्ञात है।
जीवन के इस सत्य का प्रत्येक व्यक्ति को कई बार भान होता है कि ज्ञात में बहुत कुछ अज्ञात है पर अहम यह मानने नहीं देता ...एक ही जीवन में जाने कितना कुछ जानने को बाकी रह जाता है ...  खैर उनके कथा वाचन में उनकी ज्ञान पर टिप्पणी  न करते हुए बताते चलूँ कि स्वामी जी और उनके साथी रामकथा तथा अन्य भजन बहुत सुर में सुनाते हैं इसलिए आनंद रस भरपूर प्राप्त हुआ... उनके भजन  में फ़िल्मी टोन  नहीं बल्कि भरपूर शास्त्रीयता है जो हमारे जैसे श्रोता को बांधे रखती है। कथावाचक रामकथा के बीच-बीच में आज के समयानुसार कई रोचक दृष्टांत , कथाएं भी सुनाते हैं जिससे वाचन की रोचकता बनी  रहे।
ऐसी ही एक छोटी सी रोचक कथा साझा करने योग्य  है...

एक अभिमानी राजा मद में भरा हाथी पर नगर भ्रमण को निकला। तभी रास्ते से गुजर रहे एक साधू ने दानी जानकार  राजा से दान प्राप्त करने के लिए अपना वस्त्र आगे फैला दिया।    अभिमान में भरे उस चिड़चिड़े राजा ने इधर -उधर देखा  . तभी उसकी नजर हाथी द्वारा तुरंत की गई लीद पर गई।  उसने  अपने सैनिक को आदेश दिया कि वह लीद  उठा कर साधु की झोली में डाल  दे। राजा जब भ्रमण कर महल पहुंचा  और भोजन करने बैठा तो जैसे ही ग्रास उठता सुस्वादु व्यंजनों की भरी थाली में उसे लीद  ही लीद दिख पड़ी। कई ग्रास छोड़े ,कई  थालियां बदलीं मगर प्रत्येक ग्रास में वही लीद  नजर आये। भूख से बेचैन राजा की तकलीफ देख कर राज ज्योतिषी को बुलाया गया। उसने राजा द्वारा लीद का दान करने की घटना का प्रभाव बताया।
अब इसका क्या उपाय किया जाए। सोचते हुए ज्योतिषी ने सुझाया कि  राजा स्वयं ऐसे कार्य करे जिससे उसकी सर्वत्र निंदा हो ताकि राजा की जितनी अधिक निंदा होगी उसके पाप निंदा करने वाले के हिस्से में स्थानांतरित हो जाएंगे क्योंकि जो व्यक्ति किसी की निंदा करता है वह उसके पाप को स्वयं ढ़ोता  है। अपनी करनी से स्वयं अपनी निंदा कौन सुनना चाहता है मगर कोई उपाय न देख राजा ने मुनादी करवाई कि सभी नागरिक राजा की खूब  बुराई करें. प्रजा को अच्छा अवसर प्राप्त हुआ। जिसको देखो जी खोलकर राजा की निंदा करता नजर आता। धीरे -धीरे राजा की थाली से लीद कम होती जाती थी मगर फिर भी भोजन में चटनी जितनी लीद थाली में बनी ही रहती। राजा ने फिर बुलाया ज्योतिषी को...ज्योतिषी ने  बताया कि राजन आपके राज्य में सिर्फ एक व्यक्ति है जो किसी  की निंदा नहीं करता और आपकी थाली में बची हुई लीद  का कारण भी वही है। राजा ने अपनी पूरी शक्ति लगा दी कि  वह व्यक्ति उसकी बुराई करें मगर निंदा करना उसका स्वाभाव ही नहीं था। थक हार कर राजा ने सामान्य नागरिक का वेश बनाया और उस व्यक्ति के पास पहुँच कर अपनी खूब बुराई करता रहा मगर उस व्यक्ति के मुंह से एक भी शब्द निंदा का नहीं कहलवा पाया। राजा के लगातार प्रयास को देख वह व्यक्ति हँस पड़ा  क्योंकि वह राजा को पहचान गया था  . उसने कहा कि राजन आप कितनी भी प्रयत्न करें मगर मेरी जुबान से आपकी निंदा नहीं निकलेगी  . चटनी भर ही सही लीद तो आपको खानी  ही पड़ेगी। अब राजा की समझ में आ गया था कि वचन और कर्म में सावधानी  प्रारम्भ से ही अपेक्षित है.  जब हम किसी की निंदा कर रहे होते हैं तब उसके पाप का भाग अपने ऊपर लाद  रहे होते हैं और जब निंदा झूठी हो तब तो उसके भार का कहना ही क्या  ....

कहते हैं न भाव सिर्फ कहानी सुनने तक ही जगते हैं फिर से वही वास्तविकता...मगर सुनने में आनंद मिला तो लिख कर बाँटना अच्छा लगा. हम न सही, किसी एक का भी जीवन बदल जाये तो लाभ ही होगा और नुकसान तो कुछ भी नहीं.
     

9 टिप्‍पणियां:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, मजदूर दिवस पर क्या याद आते हैं बाल मजदूर !? “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  2. आपने तो कथा श्रवण की उसका आनन्द ही अद्भुद होगा .... परन्तु पढ़कर भी बहुत अच्छी लगी कथा .... ब्लॉगिंग की इस पहल पर हार्दिक अभिनंदन और स्वागत 💐💐

    उत्तर देंहटाएं
  3. मजेदार और सार्थक भी |

    वचन और कर्म में सावधानी प्रारम्भ से ही अपेक्षित है..... जब निंदा झूठी हो तब तो उसके भार का कहना ही क्या .... सबक जैसी बातें हैं

    उत्तर देंहटाएं
  4. रोचक और ज्ञानवर्धक

    उत्तर देंहटाएं
  5. प्रेरक कथा ! मंगलकामनाएं

    उत्तर देंहटाएं
  6. प्रेक और साथ ही मजेदार भी ...
    आपने ब्लॉग आने की शुरुआत की ये अच्छी बात है ... इसे निरंतर रखियेगा ...

    उत्तर देंहटाएं