तुम्हारा हाथ हाथ में लिए
नहर के किनारे
सरसों के खेतों की पगडंडियों पर
गुनगुनी धूप में
देर तक चलते
दूर जाती ट्रेन की आवाज से पलटते
आबादी से दूर पाकर ख़ुद को
भाग कर हांफते हुए लौटते
कितने गीतों के मुखड़े साथ गुनगुनाये
आज वे गीत जब किसी ने गाये
तुम याद आए.....
बहुत याद आए .......